मैंने अबू बक्र, उमर तथा उसमान के साथ नमाज़ पढ़ी, लेकिन उनमें से किसी को "بسم الله الرحمن ا…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मैंने अबू बक्र, उमर तथा उसमान के साथ नमाज़ पढ़ी, लेकिन…

عن أَنَس بن مالك رضي الله عنه «أنّ النبي صلى الله عليه وسلم وأبا بكر وعمر رضي الله عنهما : كانوا يَسْتَفْتِحُونَ الصلاة بـ"الحمد لله رب العالمين"».
وفي رواية: « صَلَّيْتُ مع أبي بكر وعمر وعثمان، فلم أسمع أحدا منهم يقرأ "بسم الله الرحمن الرحيم"».
ولمسلم: « صَلَّيْتُ خلف النبي صلى الله عليه وسلم وأبي بكر وعمر وعثمان فكانوا يَسْتَفْتِحُونَ بـ"الحمد لله رب العالمين"، لا يَذْكُرُونَ "بسم الله الرحمن الرحيم" في أول قراءة ولا في آخرها».

हदीस की व्याख्या: मैंने अबू बक्र, उमर तथा उसमान के साथ नमाज़ पढ़ी, लेकिन…

अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सलल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके ख़लीफ़ों के साथ लंबे समय तक रहने के बावजूद उन्होंने उनमें से किसी को नमाज़ में "بسم الله الرحمن الرحيم" पढ़ते हुए नहीं सुना। न सूरा फ़ातिहा पढ़ने से पहले न बाद में। बल्कि, वे नमाज़ "الحمد لله رب العالمين" से शुरु करते थे। ज्ञात हो कि बिस्मिल्लाह पढ़ने और ऊँची आवाज़ से पढ़ने के बारे में उलेमा के कई मत हैं। लेकिन, सबसे सही मत यह है कि नमाज़ी प्रत्येक रकअत में सूरा फ़ातिह़ा से पहले धीमी आवाज़ में बिस्मिल्लाह कहेगा, चाहे नमाज़ धीमी आवाज़ में क़िराअत वाली हो या ऊँची आवाज़ में क़िराअत वाली।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ का तरीक़ा

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद