क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद में रख लेती है, लेकिन छूटी हुई नमाज़…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद म…

हदीस की व्याख्या: क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद म…

मुआज़ा ने आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछा कि आख़िर क्या कारण है कि अल्लाह ने मासिक धर्म के दिनों में छूटे हुए रोज़ों को बाद में रख लेने आदेश दिया है, लेकिन इस अवधि में छूटी हुई नमाज़ों को बाद में पढ़ने का आदेश नहीं दिया, जबकि दोनों फ़र्ज़ इबादतें हैं, बल्कि नमाज़ रोज़े की तुलना में अधिक बड़ी इबादत है? चूँकि दोनों के बीच अंतर न करने का कठिनता पर आधारित निर्णय ख़्वारिज का है, इसलिए आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने उनसे कहा कि क्या तुम हरूरी अर्थात ख़ारिजी हो कि उन्हीं जैसी आस्था रखती हो और उन्हीं जैसी उग्रता दिखा रही हो? उन्होंने कहाः मैं हरूरी नहीं हूँ, मैं केवल जानने और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए पूछ रही हूँ। यह सुन, आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने कहाः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हम माहवारी के दिनों से गुज़रते, तो रोज़ा और नमाज़ दोनों छोड़ देते, फिर आप हमें बाद में रोज़ा रख लेने का आदेश देते, लेकिन नमाज़ पढ़ने का आदेश नहीं देते। अगर ऐसा करना ज़रूरी होता, तो आप हमें ज़रूर आदेश देते और ख़ामोश नहीं रहते। एक तरह से वह कहना चाहती थीं कि हिकमत और हिदायत की बात यही है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेशों का पालन किया जाए और आपकी ओर से निर्धारित सीमाओं को पार न किया जाए।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · तहारत (पवित्रता प्राप्त करना) · रोज़े · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · हैज़, निफ़ास एवं इसतिहाज़ा · रोज़ों की क़ज़ा

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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