मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत बाक़ी हैं। तथा जब जिहाद के लिए निकलन…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत ब…

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم يوم فتح مكة: «لا هجرة بعد الفتح، ولكن جهاد ونية. وإذا اسْتُنْفِرْتُم فَانْفِرُوا. وقال يوم فتح مكة: «إن هذا البَلد حَرَّمَهُ الله يوم خلق الله السموات والأرض، فهو حَرَامٌ بحُرْمَةِ الله إلَى يوم القيامة، وإنه لم يحل القتال فيه لِأَحَدٍ قَبْلِي، ولم يَحِلَّ لي إلا ساعة من نهار، حرام بِحرمة الله إلى يوم القيامة، لا يُعْضَدُ شَوْكُهُ، وَلاَ يُنَفَّرُ صَيْدُهُ، وَلاَ يَلْتَقِطُ لُقَطَتَهُ إلا من عَرَّفَهَا، ولاَ يُخْتَلَى خَلاَهُ». فقال العباس: يا رسول الله، إلا الإِذْخِرَ؛ فإنه لِقَيْنِهِمْ وبيوتهم؟ فقال: «إلا الإِذْخِرَ».

हदीस की व्याख्या: मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत ब…

अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मक्का विजय के दिन संबोधन के लिए खड़े हुए, तो फ़रमाया : अब मक्का से हिजरत नहीं रही। क्योंकि यह अब इसलामी नगर बन चुका है। हाँ, अल्लाह की राह में जिहाद बाक़ी है। अतः, जिसे जिहाद के लिए निकलने को कहा जाए, वह अल्लाह तथा उसके रसूल और अमीर की बात मानते हुए जिहाद के लिए ज़रूर निकले। फिर आपने मक्के के सम्मान एवं आदर का उल्लेख किया और बताया कि इसका यह आदर एवं सम्मान उसी दिन से है, जिस दिन अल्लाह ने आकाशों एवं धरती की रचना की थी। यह भी बताया कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पहले किसी के लिए यहाँ युद्ध करना हलाल नहीं किया गया था और आपके बाद भी किसी के लिए हलाल नहीं किया जाएगा। बल्कि, आपके लिए भी कुछ देर के लिए ही हलाल हुआ था और फिर उसकी हुरमत लौट आई है। फिर आपने मक्का के सम्मान का उल्लेख करते हुए बताया कि हरम के काँटे काटे नहीं जाएँगे, उसकेे जानवरों का शिकार नहीं किया जाएगा, वहाँ गिरी हुई चीज़ उस व्यक्ति के सिवा कोई उठा नहीं सकता, जो उसका ऐलान करना चाहता हो और उसकी घास उखाड़ी नहीं जा सकती। अलबत्ता, मक्का वालों के हित के मद्देनज़र इज़खिर को इस आदेश से अलग रखा गया है, क्योंकि लोहार लोग भट्टी जलाने के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं।

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13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद