मैंने उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के साथ ईद की नमाज़ अदा की। उन्होंने फ़रमाया कि यह…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: मैंने उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के साथ ईद की न…
हदीस की व्याख्या: मैंने उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के साथ ईद की न…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ईद अल-फ़ित्र के दिन एवं ईद अल-अज़हा के दिन रोज़ा रखने से मना किया है। ईद अल-फ़ित्र के दिन इसलिए कि उस दिन महीना भर रोज़ा रखने के बाद रोज़ा तोड़ने का दिन है और ईद अल-अज़हा के दिन इसलिए कि वह क़ुर्बानी का मांस खाने का दिन है।
सीख: मैंने उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के साथ ईद की न…
- ईद अल-फ़ित्र के दिन, ईद अल-अज़हा के दिन और तशरीक़ के दिनों में रोज़ा रखना हराम है। तशरीक़ के दिनों में इसलिए कि ये ईद अल-अज़हा के दिन के अधीन हैं। हाँ, यदि किसी (हज्ज करने वाले) के पास हद्य (क़ुर्बानी का जानवर) न हो, तो वह तशरीक़ के दिनों में रोज़ा रख सकता है।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : कहा गया है : इन दो दिनों के उल्लेख का उद्देश्य दरअसल इन दोनों दिनों में रोज़ा रखने की मनाही के कारण की ओर इशारा करना है। पहले दिन रोज़ा रखने की मनाही का कारण, रोज़े से अलग करना, रोज़े के पूरा हो जाने को दर्शाना है, जो उसके बाद रोज़ा न रहने से स्पष्ट होता है। जबकि दूसरे दिन रोज़ा रखने की मनाही का कारण क़ुर्बानी करना है, जो एक इबादत है और जिसका मांस खाया जाता है।
- मुसतहब यह है कि ख़तीब अपने ख़ुतबे में समय एवं परिस्थितियों के अनुसार शरई आदेश एवं निर्देश बयान करे।
- क़ुर्बानी का मांस खाना एक शरीयत सम्मत कार्य है।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· रोज़े
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· रोज़ेदार के लिए हराम कार्य
بسم الله الرحمن الرحيم
बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है