पाँच ओक़िया से कम (चाँदी) में ज़कात नहीं है, पाँच से कम ऊँट में ज़कात नहीं है और पाँच वसक़…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: पाँच ओक़िया से कम (चाँदी) में ज़कात नहीं है, पाँच से कम…

عن أبي سعيد الْخُدْرِي رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «ليس فيما دون خمس أَوَاقٍ صدقة، ولا فيما دون خمس ذَوْدٍ صدقة، ولا فيما دُونَ خمسة أَوْسُقٍ صدقة».

हदीस की व्याख्या: पाँच ओक़िया से कम (चाँदी) में ज़कात नहीं है, पाँच से कम…

ज़कात दरअसल धनवानों की ओर से निर्धनों को दिया जाने वाला एक सहारा और सहयोग है। यही कारण है कि ज़कात ऐसे लोगों से नहीं ली जाती, जिनके पास थोड़ा बहुत धन हो और जो धनी न समझे जाते हों।

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़कात वाजिब होने के लिए धन की निम्न सीमा निर्धारित कर दी है। जो उससे कम धन का मालिक हो, वह निर्धन है और उससे कुछ नहीं लिया जाएगा।

सोने के मालिक पर उस समय तक ज़कात वाजिब नहीं होगी, जब तक उसके पास पाँच ऊक़िया सोना न हो। याद रहे कि एक ऊक़िया चालीस दिरहम का होता है। इस तरह, सोने का निसाब दो सौ दिरहम हुआ, जो पाँच सौ नव्वे ग्राम के बराबर होता है।

ऊँट के मालिक पर उस समय तक ज़कात वाजिब नहीं है, जब तक उसके पास पाँच या उससे अधिक ऊँट न हों। इससे कम ऊँटों में ज़कात नहीं है।

जबकि अनाज तथा फल के मालिक पर उस समय तक ज़कात वाजिब नहीं है, जब तक पाँच वसक़ अनाज अथवा फल न हो। एक वसक़ साठ साअ का होता है। इस तरह गल्ला एवं फल का निसाब तीन सौ साअ हुआ।

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سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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