नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वृष्टि माँगने के लिए नमाज़ पढ़ने को निकले, तो क़िबले की ओर …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वृष्टि माँगने के लिए नमा…

عن عبد الله بن زيد بن عَاصِم المازِنِي رضي الله عنه قال: «خرج النبي صلى الله عليه وسلم يَسْتَسْقِي، فتَوَجَّه إلى القبلة يدْعو، وحَوَّل رِدَاءه، ثم صلَّى ركعتين، جَهَرَ فيهما بالقِراءة». وفي لفظ «إلى الْمُصَلَّى».

हदीस की व्याख्या: नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वृष्टि माँगने के लिए नमा…

अल्लाह तआला अपने बंदों को विभिन्न तरीक़ों से आज़माता है, ताकि वे केवल उसी को पुकारें और उसे याद करें। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में जब बारिश न होने के कारण अकाल पड़ा, तो आप, अल्लाह से बारिश माँगने के लिए, लोगों को आबादी से बाहर अवस्थित ईदगाह की ओर ले गए। आबादी से बाहर इसलिए ले गए, ताकि अपनी विवशता एवं लाचारी का इज़हार अधिक हो सके। वहाँ आपने क़िबले की ओर मुँह किया, जिससे दुआ क़बूल होने की आशा अधिक रहती है, फिर अल्लाह से मुसलमानों की फ़रियाद सुनने और अकाल दूर करने की दुआ करने लगे।

फिर, यह शगुन लेते हुए कि अब सुखाड़ के बाद हरियाली आएगी और बदहाली के बाद खुशहाली आएगी, आपने अपनी चादर को पलटकर एक ओर की चादर की दूसरी ओर कर दिया। फिर, लोगों को दो रकात इस्तिस्क़ा की नमाज़ पढ़ाई। नमाज़ में क़िरात ऊँची आवाज़ से की, क्योंकि उसे जमात के साथ पढ़ा गया था।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · बारिश माँगने की नमाज़

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.7 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद