जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं।
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं।
हदीस की व्याख्या: जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि सूरा फ़ातिहा पढ़े बिना नमाज़ सही नहीं होती। हर रकात में सूरा फ़ातिहा पढ़ना नमाज़ का एक स्तंभ है।
सीख: जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं।
- सूरा फ़ातिहा पढ़ने की शक्ति हो, तो कोई दूसरी चीज़ उसका स्थान नहीं ले सकती।
- जान-बूझ कर, अज्ञानता के कारण या भूलवश किसी रकात में सूरा फ़ातिहा न पढ़ी जाए, तो वह रकात बातिल हो जाती है। क्योंकि सूरा फ़ातिहा पढ़ना नमाज़ का एक स्तंभ है और नमाज़ के स्तंभ किसी भी स्थिति में छोड़े नहीं जा सकते।
- मुक़तदी इमाम को रुकू की अवस्था में पाए, तो उसे सूरा फ़ातिहा पढ़ने की ज़रूरत नहीं रहती।
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बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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