इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > जिसने खजूर का ऐसा पेड़ बेचा, जिसका परागण किया जा चुका हो, तो उसका फल बेचने वाले का होगा। ह…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عمر رضي الله عنه مرفوعًا: «من باع نخلًا قد أُبِّرَتْ فَثَمَرُهَا للبائع، إلا أن يشترط المُبْتَاعُ».
وفي رواية: «ومن ابْتَاعَ عبدا فمالُه للذي باعه إلا أن يشترط المُبْتَاعُ».
परागण का लाभ बेचने वाले को मिलना चाहिए। चूँकि फल भी परागण के नतीजे में लगते हैं, इसलिए उनपर अधिकार बेचने वाले का होगा। हाँ, यदि ख़रीदने वाला शर्त लगा दे कि फल उसी के होंगे और बेचने वाला उसकी शर्त मान ले, तो यह शर्त मान्य होगी।
इसी तरह, यदि किसी दास को उसके मालिक ने कुछ धन दे रखा हो, फिर वह उस दास को बेचना चाहे, तो उसका धन उसके मालिक यानी बेचने वाले के पास रह जाएगा, क्योंकि क्रय-विक्रय के अनुबंध के दायरे में वह नहीं आएगा। लेकिन, यदि ख़रीदने वाला उस पूरे धन अथवा उसके कुछ भाग को लेने की शर्त लगा दे, तो वह अनुबंध के दायरे में आ जाएगा।
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