चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है।…

हदीस की व्याख्या: चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है।…

ताबेई मालिक बिन औस बता रहे हैं कि उनके पास कुछ सोने के दीनार थे, जिन्हें वह चाँदी के दिरहम से बदलना चाहते थे। अतः तलहा बिन उबैदुल्लाह ने उनसे कहा कि आप ज़रा मुझे अपने दीनार दें कि मैं उन्हें देख लूँ। फिर ख़रीदने का इरादा बन गया, तो फ़रमाया कि जब हमारे सेवक आए, तो आप आ जाएँ, हम आपको चाँदी के दिरहम दे देंगे। वहाँ उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- भी मौजूद थे। चुनांचे उन्होंने इस तरह के लेन-देन को ग़लत बताया और तलहा से अल्लाह की क़सम देकर कहा कि वह या तो चाँदी अभी दे दें या फिर लिया हुआ सोना वापस कर दें। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : सोने को चाँदी से या चाँदी को सोने से बेचना हो तो लेन-देन हाथों हाथ होना चाहिए, वरना लेन-देन सूद वाला हो जाएगा, जिसकी वजह से ख़रीद-फ़रोख़्त हराम हो जाएगी। सोने को चाँदी के बदले में या चाँदी को सोने के बदले में बेचना उसी समय ठीक होगा, जब लेनदेन हाथों-हाथ हो और दोनों ओर से क़ब्ज़ा हो जाए। इसी तरह गेहूँ को गेहूँ के बदले, जौ को जौ के बदले और खजूर को खजूर के बदले बेचना उसी समय दुरुस्त होगा, जब वज़न एवं माप बराबर हो और उसी समय दोनों अपने-अपने सामानों पर क़ब्ज़ा कर लें। इन चीज़ों में न तो एक तरफ़ नक़द और एक तरफ़ उधार को जायज़ कहा जा सकता है और न क़ब्ज़े से पहले एक-दूसरे से अलग हो जाने की अनुमति दी जा सकती है।

सीख: चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है।…

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لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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