ज़ैद बिन साबित कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अ़रिय्या करने वाले…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: ज़ैद बिन साबित कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ…

عن زيد بن ثابت رضي الله عنه : «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم رخص لصاحب العَرِيَّةِ: أن يبيعها بِخَرْصِهَا».
ولمسلم: «بخرصها تمرا، يأكلونها رُطَبَاً».

हदीस की व्याख्या: ज़ैद बिन साबित कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ…

पेड़ पर लगी ताज़ा खजूरों को सूखी खजूरों के बदले बेचना, जिसे 'मुज़ाबना' कहा जाता है, हराम है; क्योंकि यहाँ एक ही श्रेणी की दो वस्तुओं के बराबर होने की जानकारी नहीं है, जो कि आवश्यक है। लेकिन इस आम नियम से 'अराया' अपवाद है। अराया, अर्थात पेड़ पर लगी ताज़ा खजूरों को कुछ ख़ास शर्तों के साथ सूखी खजूरों के बदले में बेचना। उन्हीं शर्तों में से एक यह है कि ख़रीद-बिक्री पाँच वसक़ से कम में हो। क्योंकि पहले ज़माने में नक़द, जैसे दीनार और दिरहम कम हुआ करते थे। ऐसे में, ताज़ा खजूर और उसके स्वाद के आनंद लेने का समय आता और लोगों को उसकी आवश्यकता भी होती, लेकिन उनके पास ख़रीदने के लिए नक़द नहीं होते। यही कारण है कि उन्हें ताज़ा खजूरों के स्वाद का आनंद लेने के लिए सूखी खजूरों के बदले ताज़ा खजूरें खरीदने की छूट दी। लेकिन इस बात का ख़याल रखा कि दोनों बराबर हों और इसके लिए यह अंदाज़ा लगाया जाए कि पेड़ पर लगी खजूरों का वज़न सूखने के बाद कितना हो सकता है। इस तरह 'अराया', 'मुज़ाबना' से अपवाद है, जो कि हराम है।

श्रेणियाँ : मामलात पर आधारित फ़िक़्ह · क्रय-विक्रय · संपत्ति तथा फलों का क्रय-विक्रय · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.7 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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