इस्लाम > Hi > हदीस > फजलत तथ आदब > जब कोई बंदा किसी वस्तु पर धिक्कार करता है, तो धिक्कार आकाश की ओर चल देता है, लेकिन उसके लि…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي الدرداء رضي الله عنه مرفوعاً: «إن العبد إذا لعن شيئًا، صَعَدَتِ اللعنةُ إلى السماء، فَتُغْلَقُ أبوابُ السماء دونها، ثم تَهْبِطُ إلى الأرض، فَتُغْلَقُ أبوابُها دونها، ثم تأخذ يمينًا وشمالاً، فإذا لم تجد مَسَاغًا رجعت إلى الذي لُعِنَ، فإن كان أهلا لذلك، وإلا رجعت إلى قائِلها»
जब बंदा किसी चीज़ पर अपनी ज़बान से लानत करता है, तो उसकी यह लानत आकाश की ओर चढ़ती है। लेकिन आकाश के द्वार उसके लिए बंद होते हैं। अतः वह धरती की ओर लौटने लगती है। मगर धरती के द्वार भी उसके लिए बंद हो जाते हैं और वह उसमें प्रवेश नहीं कर पाती। फिर वह दाएँ-बाएँ जाती है। यदि उसे कोई मार्ग या स्थान नहीं मिलता, तो उस चीज़ की ओर लौट जाती है, जिसपर लानत की गई है। अब यदि वह चीज़ लानत की अधिकारी है, तो उसके पास रह जाती है और अगर नहीं है, तो लानत करने वाले की ओर लौट जाती है और उसी से चिपक जाती है।
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