फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसें

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«फ़ज़ीलतें तथा आदाब» पर 744 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसों की सूची

ह़सन जब अल्लाह ने जन्नत एवं जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील अलैहिस्सलाम स़ह़ीह़ क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे स़ह़ीह़ तुम्हारी आग जहन्नम की आग के सत्तर भागों में से एक भाग है स़ह़ीह़ जिसने जान-बूझकर मुझपर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम बना ले। स़ह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर स़ह़ीह़) अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी चीज़ का ज़िक्र किया और फ़रमाया : "यह उस समय होगा, जब ज्ञान चला जाएगा स़ह़ीह़ ज्ञान इसलिए न अर्जित करो कि उलेमा से बहस कर सको और अज्ञान लोगों से झगड़ सको स़ह़ीह़ अल्लाह ने एक उदाहरण दिया है। एक सीधा रास्ता है स़ह़ीह़ क्या तुममें से किसी को यह पसंद है कि जब वह अपने परिवार की ओर लौटे, तो वहाँ तीन बड़ी-बड़ी और मोटी-मोटी गाभिन ऊँटनियाँ पाए? ह़सन क़ुरआन पढ़ने वाले से कहा जाएगा कि पढ़ते जाओ और चढ़ते जाओ। साथ ही तुम उसी तरह ठहर-ठहर कर पढ़ो, जिस तरह दुनिया में ठहर-ठहर कर पढ़ा करते थे। तुम्हारे द्व स़ह़ीह़ खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है। स़ह़ीह़ तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तु ह़सन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस आयतें पढ़ते और दूसरी दस आयतों को पढ़ना उस समय तक शुरू नहीं करते, जब तक उन दस आयतों के ज्ञान एवं अमल को सी स़ह़ीह़ अल्लाह की क़सम! ऐ अबुल मुंज़िर! तुमको यह ज्ञान मुबारक हो। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब प्रत्येक रात बिस्तर में जाते, तो अपनी दोनों हथेलियों को जमा करते, फिर उनमें फूँकते और उनमें "क़ुल हु-वल्लाहु स़ह़ीह़ जब तुम ऐसे लोगों को देखो, जो क़ुरआन की सदृश आयतों का अनुसरण करते हों, तो जान लो कि उन्हीं का नाम अल्लाह ने लिया है। अतः उनसे सावधान रहना स़ह़ीह़ कोई भी बंदा जब कोई गुनाह करता है, फिर खड़े होकर पवित्रता अरजन करता है, फिर नमाज़ पढ़ता है, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करता है, तो अल्लाह उसे क्षमा कर द ज़ईफ़ (दुर्बल) उनके द्वारा की गई तुम से विश्वासघात, अवज्ञा तथा तुमसे झूठ बोलने और तुम्हारे द्वारा उनको दी गई सज़ा का हिसाब होगा स़ह़ीह़ आप ला इलाहा इल्लल्लाह कह दें, मैं क़यामत के दिन आपके लिए इसकी गवाही दूँगा ह़सन {ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ} स़ह़ीह़ जब मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और (उसके उत्तर में) तुममें से कोई "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" ( स़ह़ीह़ जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ" (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे) स़ह़ीह़ उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : मैंने नमाज़ को अपने तथा अपने बंदे के बीच आधा-आधा बाँट दिया है, तथा मेरे बंदे के लिए वह सब कुछ है, जो वह माँगे स़ह़ीह़ यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो स़ह़ीह़ अल्लाह ग्रहण उसी कार्य को करता है, जो विशुद्ध रूप से उसी के लिए उसी की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए किया गया हो। स़ह़ीह़ जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका स़ह़ीह़ अल्लाह सोता नहीं है तथा सोना उसकी महानता के अनुरूप भी नहीं है स़ह़ीह़ मैं तुम सब से ज़्यादा परहेज़गार और अल्लाह को जानने वाला हूँ। स़ह़ीह़ चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़ होगा। जिसके अंदर इनमें से एक बात होगी, उसके अंदर उसे छोड़ देने तक निफ़ाक़ की एक बात होगी। जब ब स़ह़ीह़ सुनो! तुममें से हर कोई अपने रब से मुनाजात (सरगोशी) कर रहा है, इसलिए कोई किसी को तकलीफ़ न पहुँचाए अल्लामा नववी रह़िमहुल्लाह कहते हैं : ह़दीस़ ह़सन है। “आदमी के अच्छे मुसलमान होने की एक निशानी यह है कि वह बेमतलब की चीज़ों को छोड़ दे।” ह़सन बेशक बंदा नमाज़ पढ़ता है, लेकिन उसके लिए उसमें से केवल दसवाँ, नौवाँ, आठवाँ, सातवाँ, छठा, पाँचवाँ, चौथाई, तिहाई या आधा हिस्सा ही लिखा जाता है। स़ह़ीह़ अपने कपड़ों में से सफ़ेद कपड़े पहना करो। ये तुम्हारे सबसे अच्छे कपड़ों में से हैं। तथा इन्हीं में अपने मुर्दों को दफ़न किया करो। स़ह़ीह़ ''जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके कर्मों का सिलसिला रुक जाता है, सिवाय तीन चीज़ों के : स़दक़ा जारिया (अनवरत चलने वाला दान), ऐसी विद्या छोड़कर जाना स़ह़ीह़ ''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ पढ़ता है, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है : (हम सब अल्लाह के हैं और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है स़ह़ीह़ इसे छोड़ दो, क्योंकि यह एक बदबूदार चीज़ है। स़ह़ीह़ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता स़ह़ीह़ जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिय स़ह़ीह़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी स़ह़ीह़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई चीज़, सिवाय अपने सफेद ख़च्चर, स़ह़ीह़ मोमिन ताना देने वाला, लानत करने वाला, बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला नहीं होता। सह़ीह़ क्या तुममें से किसी ने कोई सपना देखा है? फिर अल्लाह जिसे चाहता, वह आपके सामने अपने स्वप्न बयान करता। एक दिन सुबह के समय आपने हमसे कहा : आज रात मेरे पा ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन) तुम जायदाद मत बनाओ, अन्यथा दुनिया की चाहत में पड़ जाओगे। स़ह़ीह़ तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाओगे, चोरी नहीं करोगे, व्यभिचार नहीं करोगे स़ह़ीह़ उसपर लानत न भेजो, अल्लाह की क़सम! मुझे मालूम है कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है। स़ह़ीह़ इस्लाम की शुरूआत एक अजनबी धर्म के रूप में हुई और शीघ्र ही वह पहले के समान अजनबी बन जाएगा। ऐसे में, शुभ सूचना है अजनबियों के लिए। स़ह़ीह़ बूढ़े व्यक्ति का दिल हमेशा दो चीज़ों में जवान रहता है। दुनिया से प्रेम और लम्बी-लम्बी आशाओं में। स़ह़ीह़ तुम लोग छोटे-छोटे गुनाहों से बचा करो। ह़सन आनंद को समाप्त करने वाली चीज़ का ज़िक्र अधिक से अधिक करो।" यानी मौत का। ह़सन बेशक मुझे सदाचार को पूर्ण रूप देने के लिए भेजा गया है। स़ह़ीह़ सात प्रकार के लोग ऐसे हैं, जिनको अल्लाह उस दिन अपने अर्श के नीचे छाया देगा, जिस दिन उसकी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं होगी ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन) उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) ईमान नहीं, जिसके पास अमानतदारी न हो और उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) दीन नहीं, जो वचन का पालन न करता हो। स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी में रोज़ा, नमाज़ और सदक़ा से भी उत्तम है? स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें यह न बताऊँ कि तुममें से अच्छा कौन है और बुरा कौन? स़ह़ीह़ जो लोगों का शुक्र अदा नहीं करता, वह अल्लाह का शुक्र अदा नहीं कर सकता। स़ह़ीह़ जिस व्यक्ति ने अपने भाई से 'ऐ काफ़िर' कहा, उसके द्वारा प्रयोग किए गए इस शब्द का हक़दार उन दोनों में से एक बन गया। अगर उसकी बात सही है, तो ठीक है। अगर स़ह़ीह़ सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आदम की संतान मुझे कष्ट देती है। वह ज़माने को गाली देती है। जबकि मैं ही ज़माने (का मालिक) हूँ। मामला मेरे हाथ स़ह़ीह़ तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ स़ह़ीह़ फ़ितने दिलों पर चटाई की तीलियों की तरह एक के बाद एक आते रहते हैं स़ह़ीह़ “सारे कार्यों के प्रतिफल का आधार नीयतों पर है और प्रत्येक व्यक्ति को उसकी नीयत के अनुरूप ही परिणाम मिलेगा।
بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.7 / 29.5
रोशनी 90%
12 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद