इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > निर्धारित हिस्से उनके हक़दारों तक पहुँचा दो और निर्धारित हिस्सों के बाद जो शेष बच जाए, वह …
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «أَلْحِقُوا الفَرَائِضَ بِأَهْلِهَا، فَمَا بَقِيَ فَلِأَوْلَى رَجُلٍ ذَكَرٍ».
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मीरास (उत्तराधिकार) बाँटने वालों को आदेश दिया है कि वे उसे न्याय के साथ शरीयत के बताए हुए तरीक़े के अनुसार तक़सीम करें। अतः सबसे पहले उन लोगों को उनका भाग दें, जिनके भाग अल्लाह की किताब में निर्धारित कर दिए गए हैं। ये निर्धारित भाग हैं : दो तिहाई, एक तिहाई, छठा भाग, आधा भाग, एक चौथाई भाग और आठवाँ भाग। फिर इसके बाद जो बच जाए, वह मृतक के निकटतम पुरुष व्यक्ति को दे दिया जाए। इस तरह के लोगों को (अरबी भाषा में) 'असबा' कहा जाता है।
श्रेणियाँ : फ़राइज़ (इस्लामी उत्तराधिकार शास्त्र) · असबा (ऐसे लोग जिनका मीरास में कोई भाग निर्धारित न हो, बल्कि वह निर्धारित भाग प्राप्त करने वालों के बाद बचा हुआ धन लेते हों) · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह