दो अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के वारिस नहीं बन सकते।

इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > दो अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के वारिस नहीं बन सकते।

हदीस वर्णनकर्ता: इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

ह़सन

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

📖 1 मिनट पढ़ने का समय

हदीस का पाठ: दो अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के वारिस नहीं बन सकते…

عن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لا يَتَوَارَثُ أهل مِلَّتَيْنِ شتّى».

हदीस की व्याख्या: दो अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के वारिस नहीं बन सकते…

श्रेणियाँ : फ़राइज़ (इस्लामी उत्तराधिकार शास्त्र) · मीरास से वंचित करने वाली वस्तुएँ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद