कभी-कभी इस हाल में फ़ज्र की नमाज़ का समय आ जाता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: कभी-कभी इस हाल में फ़ज्र की नमाज़ का समय आ जाता कि अल्ल…

عن عائشة وأم سلمة رضي الله عنهما «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يُدْرِكُهُ الفجر وهو جُنٌبٌ من أهله، ثم يغتسل ويصوم ».

हदीस की व्याख्या: कभी-कभी इस हाल में फ़ज्र की नमाज़ का समय आ जाता कि अल्ल…

आइशा और उम्म-ए-सलमा -अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो- बताती हैं कि कभी-कभी ऐसा होता कि अल्लाह के -रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रात को हमबिस्तरी (संभोग) करते और स्नान किए बिना जनाबत की अवस्था ही में फ़ज़्र हो जाती। लेकिन इसके बावजूद आप रोज़ा पूरा करते और उसकी क़ज़ा नहीं करते थे। दरअसल यह बात दोनों ने उस समय कही थी, जब मरवान बिन हकम ने उनके पास आदमी भेजकर इस संबंध में पूछा था।

यह हुक्म रमज़ान तथा गैर-रमज़ान दोनों के लिए है।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · रोज़े · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · रोज़ेदार के लिए जायज़ कार्य

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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