जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लग…
हदीस की व्याख्या: जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लग…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि नींद की अवस्था में देखा जाने वाला अच्छा हर्षित करने वाला स्वप्न अल्लाह की ओर से होता है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करनी चाहिए और उसे बताना भी चाहिए। इसके विपरीत जब इन्सान को पसंद न आने वाला और दुखी करने वाला स्वप्न नज़र आए, तो जान ले कि यह शैतान की ओर से है। अतः उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इतना कर लेने के बाद उसे कोई हानि नहीं होगी। क्योंकि अल्लाह ने उपर्युक्त वस्तुओं को स्वप्न के नतीजे में सामने आने वाली बुराई से सुरक्षा का ज़रिया बनाया है।
सीख: जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लग…
- स्वप्न के प्रकार : 1- अच्छा स्वप्न। यह सच्चा स्वप्न अल्लाह की ओर से मिलने वाला सुसमाचार होता है, जो इन्सान देखता है या उसे दिखाया जाता है। 2- बिखरे हुए ख़्यालात, जिनके बारे में इन्सान जागृत अवस्था में सोचता रहता है। 3- शैतान द्वारा किसी व्यक्ति में दुःख तथा भय उत्पन्न करने का प्रयास।
- यहाँ अच्छे स्वप्न के बारे में जो कुछ बताया गया है उससे तीन बातें निकलकर सामने आती हैं : अच्छा स्वप्न देखने के बाद अल्लाह की प्रशंसा की जाए, उससे प्रसन्न हुआ जाए और उसे बताया जाए। लेकिन बताया उसी को जाए, जिससे मोहब्बत हो। उसे नहीं, जिससे नफ़रत हो।
- इसी तरह यहाँ बुरे स्वप्न के बारे में जो कुछ बताया गया, उससे पाँच बातें निकलकर आती हैं : उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, शैतान की बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, नींद से उठने के बाद तीन बार बाईं ओर थुतकारा जाए, उसका ज़िक्र किसी के सामने न किया जाए और जब सोने का इरादा हो, तो पहलू बदलकर सोया जाए। इतना कर लेने के बाद उसे कोई नुक़सान नहीं होगा।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : इसके अंदर यह हिकमत छुपी हुई है कि जब इन्सान अच्छे स्वप्न का ज़िक्र किसी ऐसे व्यक्ति के सामने करेगा, जो उससे मोहब्बत न रखता हो, तो वह द्वेष एवं ईर्ष्या के कारण उसका अनुचित अर्थ निकालेगा। ऐसे में हो सकता है कि स्वप्न का वही अर्थ सामने आ जाए और ऐसा न भी हो तो इन्सान दुखी ज़रूर होगा। इसी बात के मद्देनज़र किसी ऐसे व्यक्ति के सामने अच्छे स्वप्न का ज़िक्र करने से मना किया गया है, जो प्रिय न हो।
- नेमतें (कृपाएँ/अनुग्रह) प्राप्त होने पर और नए-नए एहसानों के मिलने पर अल्हम्दुलिल्लाह (सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है) कहना, क्योंकि यह कहना उन नेमतों की निरंतरता का कारण है।
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