चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़ होगा। जिसके अंदर इनमें से एक बात ह…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़…

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رضي الله عنهما قال: قال رَسولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَرْبَعٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ كَانَ مُنَافِقًا خَالِصًا، وَمَنْ كَانَتْ فِيهِ خَلَّةٌ مِنْهُنَّ كَانَتْ فِيهِ خَلَّةٌ مِنْ نِفَاقٍ حَتَّى يَدَعَهَا: إِذَا حَدَّثَ كَذَبَ، وَإِذَا عَاهَدَ غَدَرَ، وَإِذَا وَعَدَ أَخْلَفَ، وَإِذَا خَاصَمَ فَجَرَ».

हदीस की व्याख्या: चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़…

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चार ऐसी बातों से सावधान किया है कि जब वो किसी मुसलमान के अंदर जमा हो जाएँ, तो वह उनके कारण मुनाफ़िक़ों के बहुत ज़्यादा समरूप हो जाता है। और यह तब होगा, जब ये अवगुण उसपर हावी हो जाएँ। अगर इनमें से कोई अवगुण बहुत कम पाया जाता हो, तो वह इसमें शामिल नहीं होगा। ये चार बातें हैं :

1- जब बात करे, तो जान-बूझकर झूठ बोले और सच बोलने से कन्नी काटे।

2- जब कोई वचन दे तो उसका पालन न करे और धोखा दे डाले।

3- जब कोई वादा करे, तो उसे पूरा न करे और उसके उलटा करे।

4- जब किसी के साथ झगड़ा करे, तो बड़े सख़्त अंदाज़ में झगड़ा करे। सही-ग़लत का ख़्याल न रखे, सही का खंडन करे, उसे ग़लत ठहराए और ग़लत तथा झूठ बोले।

क्योंकि निफ़ाक़ नाम है दिल में कुछ रखने तथा ज़ाहिर कुछ और करने का और यह गुण उक्त लोगों के अंदर पाया जा रहा है। यहाँ यह याद रहे कि उक्त अवगुण रखने वाले व्यक्ति का निफ़ाक़ दरअसल उस व्यक्ति के हक़ में होगा, जिसने उससे बात की, वादा किया, उसके पास अमानत रखी और झगड़ा किया। इस हदीस का मतलब यह नहीं है कि वह इस्लाम के संंबंध में मुनाफ़िक़ है, अतः मुसलमान होने का दिखावा करता है और अंदर कुफ़्र छुपाए रखता है। दूसरी बात यह याद रहे कि जिस व्यक्ति के अंदर इनमें से कोई एक अवगुण होगा, उसके अंदर निफ़ाक़ का एक विशेषण होगा, जब तक उसे छोड़ न दे।

सीख: चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़…

श्रेणियाँ : शरई आदाब · दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें · बात करने तथा चुप रहने के आदाब · अक़ीदा · गुनाहों की मज़म्मत · फ़ज़ीलतें तथा आदाब · शाब्दिक प्रतिबंध तथा ज़बान की विनाशकारियाँ · अल्लाह के नाम और उनसे संबंधित अहकाम · निफ़ाक़ (अंदर कुफ़्र छुपाए रखना और बाहर ईमान का दिखावा करना)

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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