शिर्क (बहुदेववाद) पर हदीसें

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«शिर्क (बहुदेववाद)» पर 12 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

शिर्क (बहुदेववाद) पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) अल्लाह तआला के इस फरमानः {فَلا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَنْدَادًا وَأَنْتُمْ تَعْلَمُونَ} (अर्थात, तुम अल्लाह के स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना स़ह़ीह़ जिसने अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की क़सम खाई, उसने क़ुफ़्र अथवा शिर्क किया। ह़सन मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिख स़ह़ीह़ अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। -आपने यह बात तीन बार कही।- तथा हममें से हर व्यक्ति के दिल में इस तरह की बात आती है, सह़ीह़ क्या ऐसा नहीं है कि वे अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को हराम ठहराते हैं, तो तुम उन्हें हराम मान लेते हो तथा अल्लाह की हराम की हुई वस्तुओं को हलाल ठहरा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जादू द्वारा जादू के उपचार के बारे में पूछा गया, तो फ़रमायाः "यह शैतानी कार्य है।" सह़ीह़ जिसे अपशगुन ने उसके काम से रोक दिया, उसने शिर्क किया। सहाबा ने कहाः इसका कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) क्या है? फ़रमायाः उसका कफ़्फ़ारा यह दुआ हैः "اللهم لا स़ह़ीह़ जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी ठह सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहु) अल्लाह तआला के फ़रमानः (وَقَالُوا لا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُمْ وَلا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلا سُوَاعًا وَلا يَغُوثَ و सह़ीह़ तुम वापस जाओ, मैं किसी मुश्रिक की मदद हरिगज़ नहीं लूँगा। स़ह़ीह़ जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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