नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में खटके और तुझे यह बुरा लगे कि लोग उस…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में…

عَنِ النَّوَّاسِ بْنِ سِمْعَانَ الْأَنْصَارِيِّ رضي الله عنه قَالَ: سَأَلْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنِ الْبِرِّ وَالْإِثْمِ، فَقَالَ: «الْبِرُّ حُسْنُ الْخُلُقِ، وَالْإِثْمُ مَا حَاكَ فِي صَدْرِكَ، وَكَرِهْتَ أَنْ يَطَّلِعَ عَلَيْهِ النَّاسُ».

हदीस की व्याख्या: नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में…

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से नेकी और गुनाह के बारे में पूछा गया, तो आपने फ़रमाया :

सबसे बड़ी नेकी अच्छा व्यवहार है। अच्छा व्यवहार अल्लाह के साथ भी और अच्छा व्यवहार उसकी सृष्टि के साथ भी। अल्लाह के साथ अच्छा व्यवहार यह है कि उसका तक़वा रखा जाए और सृष्टि के साथ अच्छा व्यवहार यह है कि उनकी ओर से दिए गए कष्ट को सहन किया जाए, क्रोध कम किया जाए, हंसकर मिला जाए, अच्छी बात की जाए, रिश्ते-नातों का ध्यान रखा जाए, बात मानी जाए, नर्मी बरती जाए, उपकार किया जाए और मिल-जुलकर रहा जाए।

जबकि गुनाह ऐसी संदिग्ध चीज़ है, जो दिल में खटके, उससे दिल संतुष्ट न हो और बार-बार यह ख़्याल दिल में आता रहे कि कहीं यह गुनाह तो नहीं है और तुम उससे अच्छे एवं नेक लोगों को अवगत न होंने देना चाहो। क्योंकि स्वाभाविक रूप से, मानव आत्मा चाहती है कि लोग उसके बारे में केवल अच्छी बातें ही जानें। इसलिए यदि तुम किसी चीज़ से लोगों के अवगत होने को नापसंद करते हो, तो इसका मतलब है कि वह गुनाह है और उसमें कोई अच्छाई नहीं है।

सीख: नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में…

श्रेणियाँ : सद्व्यवहार पर आधारित फ़िक़्ह · दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें · सरहनायोग्य आचरण · दिल से संबंधित कर्म · फ़ज़ीलतें तथा आदाब

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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