''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक कि अपने भाई के लिए वही पसंद न …
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, ज…
عَنْ أَبِي حَمْزَةَ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ -خَادِمِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ- عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «لاَ يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ، حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ»
हदीस की व्याख्या: ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, ज…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि किसी व्यक्ति को संपूर्ण ईमान की दौलत उस समय तक नसीब नहीं हो सकती, जब तक अपने भाई के लिए दीन एवं दुनिया की वही चीज़ें पसंद न करे, जो अपने लिए पसंद करता हो और उसके लिए उन्हीं चीज़ों को नापसंद न करे, जिन्हें अपने लिए नापसंद करता हो। अगर अपने भाई के अंदर दीन की कोई कमी देखे, तो उसे दूर करने का प्रयास करे और कोई अच्छाई देखे, तो उसे और बढ़ावा दे और उसमें मदद करे। दीन एवं दुनिया से संबंधित सभी बातों में उसका शुभचिंतन करे।
सीख: ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, ज…
- इन्सान पर अनिवार्य है कि अपने भाई के लिए वही पसंद करे, जो अपने लिए पसंद करता हो। क्योंकि जो व्यकित अपने भाई के लिए वही पसंद न करता हो जो अपने लिए पसंद करता हो, उससे ईमान का इनकार करना, इस बात के अनिवार्य होने की पुष्टि करता है।
- दीनी भाइचारा नसबी (रक्त-संबंधी) भाइचारे से ऊपर है, इसलिए इसका अधिकार भी अधिक अनिवार्य है।
- ऐसे सभी कथन एवं कार्य, जैसे धोखा, ग़ीबत, हसद और मुसलमानों की जान, माल या इज़्ज़त-आबरू पर आक्रमण आदि हराम हैं, जो इस भाई-चारे के विपरीत हों।
- किसी कार्य पर उभारने वाले शब्दों का प्रयोग। क्योंकि आपने "अपने भाई के लिए" शब्द का प्रयोग किया है।
- किर्मानी कहते हैं : ईमान का तक़ाज़ा यह भी है कि इन्सान अपने भाई के लिए वही नापसंद करे, जो अपने लिए नापसंद करता हो। लेकिन इसका ज़िक्र आपने नहीं किया। क्योंकि किसी चीज़ से मुहब्बत से उसके विपरीत से नफ़रत लाज़िम आती है। इसलिए इसे अलग से बताने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
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बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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