अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई…

इस्लाम > Hi > हदीस > सरत ए नबव > अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई…

हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

📖 4 मिनट पढ़ने का समय

हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शु…

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शु…

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- बता रही हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य आने का आरंभ इस प्रकार हुआ कि पहले नींद की अवस्था में सच्चे सपने आते थे। जब कोई सपना देखते, वह सुबह के प्रकाश के समान साफ-साफ़ प्रकट हो जाता। फिर आप एकांत प्रिय बन गए। आप हिरा नामी गुफा में एकांत में रहा करते थे। वहाँ कई-कई रातों तक इबादत में रहा करते। खाने-पीने की चीज़ें भी साथ ले जाते। जब खाने-पीने की चीज़ें ख़त्म हो जातीं, तो मुसलमानों की माता ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास वापस आते और दोबारा कई रातों के लिए खाने-पीने की चीज़ें साथ ले जाते। यह सिलसिला जारी था कि आपपर हिरा गुफा के अंदर ही सत्य आ गया। आपके पास जिबरील नामी फ़रिश्ता आया और बोला कि आप पढ़िए। उत्तर में आपने कहा कि मुझे पढ़ना नहीं आता। आपका कहना है कि इसपर उसने मुझे पकड़कर इस तरह दबोचा कि मेरी सहन-शक्ति जवाब देने लगी। फिर उसने मुझे छोड़ दिया और दोबारा पढ़ने के लिए कहा। मैंने फिर उत्तर दिया कि मुझे पढ़ना नहीं आता, तो दोबारा पकड़कर इस तरह दबोचा कि मेरी सहन-शक्ति जवाब देने लगी। फिर छोड़ दिया और पढ़ने के लिए कहा। मैंने फिर उत्तर दिया कि मुझे पढ़ना नहीं आता, तो तीसरी बार पकड़कर दबोचा और उसके बाद कहा : "अपने रब के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया। जिसने मनुष्य को रक्त के लोथड़े से पैदा किया। पढ़, और तेरा रब बड़ा दया वाला है।" [सूरा अलक़ : 1-3] इसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- इन आयतों के साथ घर लौटे। आपका दिल मौत के डर से धड़क रहा था। मुसलमानों की माता ख़दीज़ा बिन्ते ख़ुवैलिद -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास पहुँचे और फ़रमाया : मुझे कपड़े ओढ़ा दो। मुझे कपड़े ओढ़ा दो। चुनांचे आपको कपड़ा ओढ़ा दिया गया और भय दूर हो गया। अतः जो कुछ हुआ था, ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अनहा- को बताया और कहा : मुझे अपनी जान का डर लग रहा है। यह सुन ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने कहा : ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता। अल्लाह की क़सम, अल्लाह आपको कभी ज़लील कर नहीं सकता। आप रिश्ते जोड़ते हैं, ऐसे कमज़ोर लोगों का बोझ उठाते हैं जो ख़ुद अपना बोझ उठा नहीं सकते, फ़क़ीरों एवं निर्धनों को जिनका कोई सहारा नहीं होता खर्च देते हैं, मेहमानों की खातिरदारी करते हैं और हक के सिलसिले में पेश आने वाली तकलीफों में मदद करते हैं। इसके बाद ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अनहा- आपको लेकर वरक़ा बिन नौफ़ल बिन अब्दुल उज़्ज़ा के पास पहुँचीं। वरक़ा उनके चचेरे भाई थे। वह जाहिलीयत (अरब के मुशरिकीन का रास्ता) छोड़कर ईसाई बन चुके थे। इंजील का कुछ भाग इब्रानी भाषा में लिखा करते थे। बहुत बूढ़े हो चुके थे। देखने की क्षमता भी खो चुके थे। ख़दीजा ने उनसे कहा : ऐ मेरे चचेरे भाई! अपने भतीजे की बात सुन लें। यह सुन वरक़ा ने आपसे पूछा : भतीजे, बताइए, बात क्या है? चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने जो कुछ देखा था, सब कुछ बता दिया। सब कुछ सुनने के बाद वरक़ा ने कहा : यह वही जिब्रील फ़रिश्ता है, जिसे अल्लाह ने मूसा -अलैहिस्सलाम- पर उतारा था। काश मैं उस समय ताक़तवर होता, काश मैं उस समय जीवित रहता, जब आपकी क़ौम आपको निकाल बाहर करेगी। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने पूछा : क्या लोग मुझे निकाल बाहर करेंगे? उन्होंने उत्तर दिया : हाँ। जब भी कोई व्यक्ति उस तरह का संदेश लाया जो आप लाए हैं, उसे कष्ट दिया गया और लोग उसके दुश्मन होगए। अगर मुझे आपका वह दिन मिल सका, तो मैं आपकी भरपूर मदद करूँगा। इसके कुछ समय बाद ही वरक़ा की मृत्यु हो गई और कुछ समय के लिए वह्य आने का सिलसिला बंद हो गया।

सीख: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शु…

श्रेणियाँ : सीरत-ए-नबवी · Prophet's Lineage · सीरत एवं इतिहास

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद