सीरत एवं इतिहास पर हदीसें

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«सीरत एवं इतिहास» पर 213 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

सीरत एवं इतिहास पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आप सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जा सह़ीह़ अगर तेरे पास मश्क में रखा हुआ रात का पानी है तो ठीक है, वरना हम मुँह लगाकर पी लेंगे। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और उन्हें क़ीमत नापकर देते समय कुछ अधिक दिया। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु हुई तो मेरे घर में कुछ नहीं था, जिसे कोई जानदार खाता। हाँ, मेरे पास एक ताक में थोड़ा-सा जौ रखा हुआ सह़ीह़ तुमसे पहले ऐसा भी होता था कि एक व्यक्ति को पकड़ लिया जाता, फिर उसके लिए ज़मीन में गढ़ा खोदा जाता और उसे उसमें डाल दिया जाता, उसके बाद आरा लाया जाता, उ सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे। सह़ीह़ मैं लंबी नमाज़ पढ़ने के इरादे से खड़ा होता हूँ, लेकिन किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर इस डर से अपनी नमाज़ हल्की कर देता हूँ कि कहीं उसकी माँ को तकली सह़ीह़ बच्चों को बोसा देना और उनसे स्नेह और दया करना। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक दि प्रात: को निकले और आपके शरीर पर काले बालों से बनी एक चादर थी, जिसपर कजावे के चित्र बने थे। सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपने नितंब को धरती से मिलाकर और दोनों पिंडलियों को खड़ा करके बैठकर खजूर खाते हुए देखा है। सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दो हरे रंग के कपड़ों में देखा है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का विजय के वर्ष मक्का में दाखिल हुए तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने निरंतर रोज़ा रखने से मना किया है। लोगों ने कहा कि आप तो निरंतर रोज़े रखते हैं? आपने फ़रमाया: मैं तुम्हरे जैस सह़ीह़ मैं तुम्हें जिस चीज़ से रोकूँ, उससे बचते रहो और जिस चीज का आदेश दूँ, उसे जहाँ तक हो सके किए जाओ, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को उनके अधिक प्रश्नों और सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का सबसे प्रिय वस्त्र कुर्ता था। सह़ीह़ जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे। सह़ीह़ एक खुजूर का तना था, जिसपर खड़े होकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा का प्रवचन देते थे। फिर जब मिंबर रखा गया तो हमने उस तने से दस माह की स़ह़ीह़ बनी इसराईल का मार्गदर्शन नबीगण किया करते थे। जब एक नबी मृत्यु को प्राप्त हो जाता, तो उसके स्थान पर दूसरा नबी आ जाता। मगर मेरे बाद कोई नबी नहीं होगा। अ सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जा रहा था और आपके शरीर पर एक मोटे किनारे वाली नजरानी चादर थी। इसी बीच, आपको एक देहाती मिला और बड़ सह़ीह़ निश्चय अल्लाह ने मुझे एक शरीफ़ बंदा बनाया है। मुझे अभिमानी और विद्वेषी नहीं बनाया है। सह़ीह़ तबूक युद्ध के समय जब लोगों को अकाल का सामना करना पड़ा, तो वे कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल, यदि आप अनुमति दें, तो हम अपने ऊँटों को ज़बह करके उनका मांस खा सह़ीह़ मेरे पास जो माल होगा, उसे तुम लोगों से बचाकर नहीं रखूँगा। लेकिन याद रखो, जो माँगने से बचेगा, अल्लाह उसे माँगने से बचाएगा, जो बेनियाज़ी दिखाएगा, अल्लाह सह़ीह़ मेरा और तुम्हार उदाहरण उस व्यक्ति की तरह है, जिसने आग जलाई, तो टिड्डे तथा पतिंगे उसमें गिरने लगे और वह उन्हें उससे रोकने लगे। (बिलकुल उसी तरह) मैं तुम सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख ब सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक क़ब्र पर मुर्दे को दफ़नाए जाने के बाद नमाज़ पढ़ी और चार तकबीरें कहीं। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन फ़ज्र की नमाज़ में "الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ" और هَلْ أتى" على الإنسان" पढ़ते थे। स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर वह उन्हें कठिनाई में डाले, तो तू उसे कठिनाई में डाल। और जो मेरी उम्मत की कोई ज़िम्म सह़ीह़ जो दया नहीं करता, उसपर दया नहीं की जाती। सह़ीह़ ऐ जिबरील, मुहम्मद के पास जाओ और बता दो कि हम आपको आपकी उम्मत के बारे में प्रसन्न कर देंगे और आपको नाराज़ नहीं होने देंगे। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे और मुझपर दया कर तथा मुझे रफ़ीक़-ए- आला (नबियों, शहीदों, सिद्दीक़ों तथा नेक लोगों) से मिला दे। सह़ीह़ एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक बुनी हुई धारीदार चादर लेकर आईं सह़ीह़ मदीने की दासियों में से कोई दासी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हाथ पकड़ लेती और आपको जहाँ चाहती, ले जाती। सह़ीह़ मुझे मेरी चादर ला दो। देखो, यदि मेरे पास इस काँटेदार पेड़ के समान भी जानवर होते, तो मैं उन्हें तुम्हारे बीच बाँट देता। फिर तुम मुझे कंजूस एवं झूठा तथा सह़ीह़ उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है। सह़ीह़ इन लोगों ने मुझे दो ही विकल्प दिए : या तो वे ज़िद और हठ के साथ माँगते रहें या फिर मुझे कंजूस कहें। जबकि मैं कंजूस नहीं हूँ। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी-कभी) सारी स्त्रियों के पास जाने के पश्चात एक ही दफा अंत में ग़ुस्ल (स्नान) करते थे। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी एक पत्नी का वलीमा दो मुद्द जौ से किया था। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया। सह़ीह़ तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी उस बीमारी के दिनों में, जिसमें आपकी मृत्यु हुई, पूछते थेः "मैं कल कहाँ रहूँगा? मैं कल कहाँ रहूँगा?" दरअ सह़ीह़ जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे सह़ीह़ मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ा करता था, तो आपकी नमाज़ भी संतुलित हुआ करती थी और आपका ख़ुतबा भी। सह़ीह़ हम लोग खंदक़ के दिन गड्ढा खोद रहे थे कि एक मज़बूत चट्टान निकल आई। सारे लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और कहने लगे कि खंदक़ में एक चट्टान सह़ीह़ "वह आजीविका थी, जिसे अल्लाह ने तुम लोगों के लिए निकाला था। क्या तुम्हारे पास उसका कुछ मांस है कि हमें भी खिला सको?" हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अल सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- लगातार कई-कई रात भूखे पेट गुज़ार देते और आपके घर वालों को भी रात का खाना नसीब नहीं होता। उनकी रोटी अधिकतर जौ सह़ीह़ ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु और उनका क़र्ज़ अदा करने का क़िस्सा। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक यहूदी से खाने की वस्तु ख़रीदी और उसके पास अपना लोहे का कवच गिरवी रख दिया। सह़ीह़ बनी इसराईल में तीन व्यक्ति थे; एक सफ़ेद दाग वाला, दूसरा गंजा और तीसरा अंधा। अल्लाह ने उनकी परीक्षा के उद्देश्य से उनके पास एक फ़रिश्ता भेजा। सह़ीह़ मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया तो आपको बुख़ार था। मैंने आपके शरीर पर हाथ रखा। सह़ीह़ क्या तुम समझते हो कि मैंने तुम्हारा ऊँट लेने के लिए उसका मूल्य कम लगाया है? तुम अपना ऊँट और अपने दिर्हम ले लो। सब तुम्हारा है। स़ह़ीह़ कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वह इस प्रकार की बात करने लगे हैं। मैं तो नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सोता भी हूँ। कभी रोज़ा रखता हूँ, कभी नहीं भी रखता। औरतों स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सब लोगों से ज़्यादा दानी थे। खासकर रमज़ान में जब जिबरील अलैहिस्सलाम से आपकी मुलाक़ात होती तो और अधिक दानी हो ज स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सबसे उत्तम चरित्र के इनसान थे। सह़ीह़ एक यहूदी लड़का अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सेवा किया करता था। सह़ीह़ यदि मुझे बकरी के पाये तथा बाँह का गोश्त खाने के लिए बुलाया जाए तो स्वीकार कर लूँगा सह़ीह़ अल्लाह ने जितने भी नबी भेजे, सभों ने बकरी चराई है सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) घर में क्या करते थे? उन्होंने कहा कि आप अपने घर वालों की सेवा में लगे रहते और जब नमाज़ का समय आता, तो नमाज़ क सह़ीह़ मैंने किसी मोटे और महीन रेशम को नहीं छुआ है, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हाथ से अधिक मुलायम हो
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.1 / 29.5
रोशनी 94%
12 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद