जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क…
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, त…
हदीस की व्याख्या: जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, त…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जब दो मुसलमान किसी रास्ते आदि में मिलते हैं और एक-दूसरे को सलाम तथा मुसाफ़हा करते हैं, तो दोनों के अलग होने से पहले उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। याद रहे कि यहाँ अलग होने से मुराद शारीरिक रूप से अलग होना भी हो सकता है और मुसाफ़हा सम्पन्न करना भी।
सीख: जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, त…
- मुलाक़ात के समय मुसाफ़हा करना मुसतहब है और इसकी प्रेरणा दी गई है।
- मुनावी कहते हैं : सुन्नत यह है कि अगर कोई मजबूरी न हो तो दाएँ हाथ को दाएँ हाथ पर रखा जाए।
- सलाम को आम करने की प्रेरणा और एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान भाई से मुसाफ़हा करने के बड़े प्रतिफल का बयान।
- इस हदीस के दायरे में हराम मुसाफ़हा बाहर है। जैसे किसी अजनबी महिला से मुसाफ़हा करना।
श्रेणियाँ :
फ़ज़ीलतें
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· सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब
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बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
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