हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग के पानी को कुछ शुमार नहीं करती थीं।
इस्लाम > Hi > हदीस > इबदत पर आधरत फकह > हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग के पानी को कुछ शुमार नहीं करती थीं।
हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद ने इन शब्दों के साथ रिवायत किया है। जबकि बुख़ारी ने (بعد الطهر, अर्थात; पवित्र हो जाने के बाद) की वृद्धि के बिना रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समय
हदीस का पाठ: हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग क…
हदीस की व्याख्या: हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग क…
सहाबिया उम्म-ए-अतिया रज़ियल्लाहु अनहा बताती हैं कि औरतें अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में माहवारी से पाक हो जाने के बाद योनि से निकलने वाले हल्के काले या हल्के पीले रंग के पानी को माहवारी का खून नहीं समझती थीं और इसके कारण नमाज़ एवं रोज़ा नहीं छोड़ती थीं।
सीख: हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग क…
- माहवारी से पाक हो जाने के बाद औरत की योनि से जो पानी निकलता है, वह माहवारी का रक्त नहीं समझा जाएगा, अगरचे उसमें रक्त से प्राप्त होने वाला गदलापन और पीलापन ही क्यों न हो।
- लेकिन अगर माहवारी एवं मामूल के दिनों में गदले और पीले रंग का पानी निकले, तो उसे माहवारी का रक्त ही समझा जाएगा, क्योंकि यह अपने समय पर निकलने वाला रक्त है। यह और बात है कि उसमें पानी की मिलावट है।
- औरत पाक हो जाने के बाद गदले और पीले रंग के पानी के कारण नमाज़ और रोज़ा नहीं छोड़ेगी। वज़ू करके नमाज़ पढ़ लिया करेगी।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· तहारत (पवित्रता प्राप्त करना)
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· हैज़, निफ़ास एवं इसतिहाज़ा
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
لا حول ولا قوة إلا بالله
अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं