क़ुरआन का पृष्ठ 371 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 371 28 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 19, हिज़्ब 37 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 371

28
आयतें
19
जुज़
37
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 371 में सूरह

الشعراء · जुज़ 19
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जुज़ 19
पृष्ठ 371
سورة الشعراء
जुज़ 19 41.3% (140/339)
हिज़्ब 37 83.8% (140/167)

وَٱجْعَل لِّى لِسَانَ صِدْقٍۢ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿84﴾

और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्रे ख़ैर क़ायम रख

وَٱجْعَلْنِى مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ ٱلنَّعِيمِ ﴿85﴾

और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना

وَٱغْفِرْ لِأَبِىٓ إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿86﴾

और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है

وَلَا تُخْزِنِى يَوْمَ يُبْعَثُونَ ﴿87﴾

और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना

يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌۭ وَلَا بَنُونَ ﴿88﴾

जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले

إِلَّا مَنْ أَتَى ٱللَّهَ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍۢ ﴿89﴾

मगर जो शख्स ख़ुदा के सामने (गुनाहों से) पाक दिल लिए हुए हाज़िर होगा (वह फायदे में रहेगा)

وَأُزْلِفَتِ ٱلْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ ﴿90﴾

और बेहश्त परहेज़ गारों के क़रीब कर दी जाएगी

وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ ﴿91﴾

और दोज़ख़ गुमराहों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी

وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ ﴿92﴾

और उन लोगों (अहले जहन्नुम) से पूछा जाएगा कि ख़ुदा को छोड़कर जिनकी तुम परसतिश करते थे (आज) वह कहाँ हैं

مِن دُونِ ٱللَّهِ هَلْ يَنصُرُونَكُمْ أَوْ يَنتَصِرُونَ ﴿93﴾

क्या वह तुम्हारी कुछ मदद कर सकते हैं या वह ख़ुद अपनी आप बाहम मदद कर सकते हैं

فَكُبْكِبُوا۟ فِيهَا هُمْ وَٱلْغَاوُۥنَ ﴿94﴾

फिर वह (माबूद) और गुमराह लोग और शैतान का लशकर

وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ ﴿95﴾

(ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे

قَالُوا۟ وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ ﴿96﴾

और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे

تَٱللَّهِ إِن كُنَّا لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍ ﴿97﴾

ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे

إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿98﴾

कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे

وَمَآ أَضَلَّنَآ إِلَّا ٱلْمُجْرِمُونَ ﴿99﴾

और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया

فَمَا لَنَا مِن شَـٰفِعِينَ ﴿100﴾

तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं

وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍۢ ﴿101﴾

और न कोई दिलबन्द दोस्त हैं

فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةًۭ فَنَكُونَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿102﴾

तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿103﴾

इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿104﴾

और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है

كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿105﴾

(यूँ ही) नूह की क़ौम ने पैग़म्बरो को झुठलाया

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿106﴾

कि जब उनसे उन के भाई नूह ने कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते मै तो तुम्हारा यक़ीनी अमानत दार पैग़म्बर हूँ

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿107﴾

तुम खुदा से डरो और मेरी इताअत करो

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿108﴾

और मैं इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ उजरत तो माँगता नहीं

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿109﴾

मेरी उजरत तो बस सारे जहाँ के पालने वाले ख़ुदा पर है

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿110﴾

तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग बोले जब कमीनो मज़दूरों वग़ैरह ने (लालच से) तुम्हारी पैरवी कर ली है

۞ قَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ لَكَ وَٱتَّبَعَكَ ٱلْأَرْذَلُونَ ﴿111﴾

तो हम तुम पर क्या ईमान लाएं

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 4 रबी अल-सानी
الخميس 4 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 5.5 / 29.5
रोशनी 30%
9 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है