क़ुरआन का पृष्ठ 451 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 451 27 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 23, हिज़्ब 45 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 451

27
आयतें
23
जुज़
45
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 451 में सूरह

الصافات · जुज़ 23
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जुज़ 23
पृष्ठ 451
سورة الصافات
जुज़ 23 51.0% (182/357)
हिज़्ब 45 91.0% (182/200)

فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ﴿127﴾

तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿128﴾

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿129﴾

और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा

سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ ﴿130﴾

कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿131﴾

हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿132﴾

बेशक वह हमारे (ख़ालिस) ईमानदार बन्दों में थे

وَإِنَّ لُوطًۭا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿133﴾

और इसमें भी शक नहीं कि लूत यक़ीनी पैग़म्बरों में से थे

إِذْ نَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿134﴾

जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी

إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿135﴾

मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿136﴾

फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया

وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ﴿137﴾

और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)

وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴿138﴾

तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿139﴾

और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे

إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ ﴿140﴾

(वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ ﴿141﴾

तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)

فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌۭ ﴿142﴾

तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे

فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ ﴿143﴾

फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते

لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ﴿144﴾

तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते

۞ فَنَبَذْنَـٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌۭ ﴿145﴾

फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया

وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةًۭ مِّن يَقْطِينٍۢ ﴿146﴾

और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया

وَأَرْسَلْنَـٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ﴿147﴾

और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)

فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَـٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍۢ ﴿148﴾

तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ ﴿149﴾

तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे

أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِنَـٰثًۭا وَهُمْ شَـٰهِدُونَ ﴿150﴾

(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे

أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ ﴿151﴾

ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है

وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَـٰذِبُونَ ﴿152﴾

और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं

أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ ﴿153﴾

क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 4 रबी अल-सानी
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