क़ुरआन का पृष्ठ 452 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 452 29 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 23, हिज़्ब 46 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 452

29
आयतें
23
जुज़
46
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 452 में सूरह

الصافات · जुज़ 23
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जुज़ 23
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سورة الصافات
जुज़ 23 58.5% (209/357)
हिज़्ब 46 5.7% (9/157)

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ﴿154﴾

(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ﴿155﴾

तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते

أَمْ لَكُمْ سُلْطَـٰنٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿156﴾

या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

فَأْتُوا۟ بِكِتَـٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿157﴾

तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो

وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًۭا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ﴿158﴾

और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे

سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿159﴾

ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿160﴾

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ ﴿161﴾

ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद

مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَـٰتِنِينَ ﴿162﴾

उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ ﴿163﴾

मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है

وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿164﴾

और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ ﴿165﴾

और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ ﴿166﴾

और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं

وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ ﴿167﴾

अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे

لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًۭا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿168﴾

कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता

لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿169﴾

तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते

فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ﴿170﴾

(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿171﴾

और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है

إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ ﴿172﴾

कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी

وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَـٰلِبُونَ ﴿173﴾

और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ ﴿174﴾

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ﴿175﴾

और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ﴿176﴾

तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं

فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿177﴾

फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ ﴿178﴾

और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ﴿179﴾

और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें

سُبْحَـٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿180﴾

ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है

وَسَلَـٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿181﴾

और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो

وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿182﴾

और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 18.2 / 29.5
रोशनी 87%
11 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद