मुसहफ़ का पृष्ठ 601 17 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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وَٱلْعَصْرِ ﴿1﴾
नमाज़े अस्र की क़सम
إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَفِى خُسْرٍ ﴿2﴾
बेशक इन्सान घाटे में है
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ ﴿3﴾
मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे
وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ ﴿1﴾
हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है
ٱلَّذِى جَمَعَ مَالًۭا وَعَدَّدَهُۥ ﴿2﴾
जो माल को जमा करता है और गिन गिन कर रखता है
يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُۥٓ أَخْلَدَهُۥ ﴿3﴾
वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा
كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلْحُطَمَةِ ﴿4﴾
हरगिज़ नहीं वह तो ज़रूर हुतमा में डाला जाएगा
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحُطَمَةُ ﴿5﴾
और तुमको क्या मालूम हतमा क्या है
نَارُ ٱللَّهِ ٱلْمُوقَدَةُ ﴿6﴾
वह ख़ुदा की भड़काई हुई आग है जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी
ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلْأَفْـِٔدَةِ ﴿7﴾
ये लोग आग के लम्बे सुतूनो
إِنَّهَا عَلَيْهِم مُّؤْصَدَةٌۭ ﴿8﴾
में डाल कर बन्द कर दिए
فِى عَمَدٍۢ مُّمَدَّدَةٍۭ ﴿9﴾
जाएँगे
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَـٰبِ ٱلْفِيلِ ﴿1﴾
ऐ रसूल क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ क्या किया
أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍۢ ﴿2﴾
क्या उसने उनकी तमाम तद्बीरें ग़लत नहीं कर दीं (ज़रूर)
وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ ﴿3﴾
और उन पर झुन्ड की झुन्ड चिड़ियाँ भेज दीं
تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍۢ مِّن سِجِّيلٍۢ ﴿4﴾
जो उन पर खरन्जों की कंकरियाँ फेकती थीं
فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍۢ مَّأْكُولٍۭ ﴿5﴾
तो उन्हें चबाए हुए भूस की (तबाह) कर दिया