क़ुरआन का पृष्ठ 600 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 600 21 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 600

21
आयतें
30
जुज़
60
हिज़्ब
3
सूरह
العاديات · जुज़ 30
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जुज़ 30
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سورة العاديات
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हिज़्ब 60 71.9% (207/288)

وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ ﴿10﴾

और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे

إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّخَبِيرٌۢ ﴿11﴾

बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाक़िफ़ होगा

ٱلْقَارِعَةُ ﴿1﴾

खड़खड़ाने वाली

مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿2﴾

वह खड़खड़ाने वाली क्या है

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿3﴾

और तुम को क्या मालूम कि वह खड़खड़ाने वाली क्या है

يَوْمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلْفَرَاشِ ٱلْمَبْثُوثِ ﴿4﴾

जिस दिन लोग (मैदाने हश्र में) टिड्डियों की तरह फैले होंगे

وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ ٱلْمَنفُوشِ ﴿5﴾

और पहाड़ धुनकी हुई रूई के से हो जाएँगे

فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿6﴾

तो जिसके (नेक आमाल) के पल्ले भारी होंगे

فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ ﴿7﴾

वह मन भाते ऐश में होंगे

وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿8﴾

और जिनके आमाल के पल्ले हल्के होंगे

فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٌۭ ﴿9﴾

तो उनका ठिकाना न रहा

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا هِيَهْ ﴿10﴾

और तुमको क्या मालूम हाविया क्या है

نَارٌ حَامِيَةٌۢ ﴿11﴾

वह दहकती हुई आग है

أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ ﴿1﴾

कुल व माल की बहुतायत ने तुम लोगों को ग़ाफ़िल रखा

حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ ﴿2﴾

यहाँ तक कि तुम लोगों ने कब्रें देखी (मर गए)

كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿3﴾

देखो तुमको अनक़रीब ही मालुम हो जाएगा

ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿4﴾

फिर देखो तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा

كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ ﴿5﴾

देखो अगर तुमको यक़ीनी तौर पर मालूम होता (तो हरगिज़ ग़ाफिल न होते)

لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ ﴿6﴾

तुम लोग ज़रूर दोज़ख़ को देखोगे

ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ ﴿7﴾

फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगे

ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ ﴿8﴾

फिर तुमसे नेअमतों के बारें ज़रूर बाज़ पुर्स की जाएगी

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.6 / 29.5
रोशनी 76%
10 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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