क़ुरआन का रुकू 388 पढ़ें

रुकू 388 सूरह As-Saffat (आयत 75 से 113) से है। इसमें 39 आयतें हैं और यह जुज़ 23 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 388

39
आयतें
1
सूरह
23
जुज़
v.75 – v.113
आयतें

रुकू 388 में सूरह

الصافات · जुज़ 23
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पृष्ठ 448
रुकू 388
سورة الصافات
जुज़ 23 36.4% (130/357)
हिज़्ब 45 65.0% (130/200)

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ ﴿75﴾

और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

وَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ﴿76﴾

और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ ﴿77﴾

और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿78﴾

और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा

سَلَـٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍۢ فِى ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿79﴾

कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿80﴾

हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿81﴾

इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿82﴾

फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया

۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ ﴿83﴾

और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे

إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍ ﴿84﴾

जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ ﴿85﴾

जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो

أَئِفْكًا ءَالِهَةًۭ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ ﴿86﴾

क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो

فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿87﴾

फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है

فَنَظَرَ نَظْرَةًۭ فِى ٱلنُّجُومِ ﴿88﴾

फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा

فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌۭ ﴿89﴾

और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ

فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ ﴿90﴾

तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए

فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ﴿91﴾

(बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं

مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ ﴿92﴾

आख़िर तुम खाते क्यों नहीं (अरे तुम्हें क्या हो गया है)

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ ﴿93﴾

कि तुम बोलते तक नहीं

فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ ﴿94﴾

फिर तो इबराहीम दाहिने हाथ से मारते हुए उन पर पिल पड़े (और तोड़-फोड़ कर एक बड़े बुत के गले में कुल्हाड़ी डाल दी)

قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ ﴿95﴾

जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ ﴿96﴾

इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो

قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَـٰنًۭا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ ﴿97﴾

हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ

فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَـٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ ﴿98﴾

और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही

وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ ﴿99﴾

तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ

رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿100﴾

वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा

فَبَشَّرْنَـٰهُ بِغُلَـٰمٍ حَلِيمٍۢ ﴿101﴾

तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَـٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَـٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ ﴿102﴾

फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ ﴿103﴾

फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया

وَنَـٰدَيْنَـٰهُ أَن يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ ﴿104﴾

और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम

قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿105﴾

तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَـٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ ﴿106﴾

इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था

وَفَدَيْنَـٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ ﴿107﴾

और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿108﴾

और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है

سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ ﴿109﴾

कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं

كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿110﴾

हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿111﴾

बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे

وَبَشَّرْنَـٰهُ بِإِسْحَـٰقَ نَبِيًّۭا مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿112﴾

और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी

وَبَـٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَـٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌۭ وَظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌۭ ﴿113﴾

जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 3 रबी अल-सानी
الأربعاء 3 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 4.1 / 29.5
रोशनी 18%
11 दिनों में पूर्णिमा
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं