क़ुरआन का रुकू 465 पढ़ें

रुकू 465 सूरह Al-Qamar (आयत 41 से 55) से है। इसमें 15 आयतें हैं और यह जुज़ 27 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 465

15
आयतें
1
सूरह
27
जुज़
v.41 – v.55
आयतें

रुकू 465 में सूरह

القمر · जुज़ 27
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سورة القمر
जुज़ 27 45.4% (181/399)
हिज़्ब 53 92.3% (181/196)

وَلَقَدْ جَآءَ ءَالَ فِرْعَوْنَ ٱلنُّذُرُ ﴿41﴾

और फिरऔन के पास भी डराने वाले (पैग़म्बर) आए

كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَـٰهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍۢ مُّقْتَدِرٍ ﴿42﴾

तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है

أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌۭ مِّنْ أُو۟لَـٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٌۭ فِى ٱلزُّبُرِ ﴿43﴾

(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है

أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌۭ مُّنتَصِرٌۭ ﴿44﴾

क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं

سَيُهْزَمُ ٱلْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ ﴿45﴾

अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे

بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَٱلسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ ﴿46﴾

बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है

إِنَّ ٱلْمُجْرِمِينَ فِى ضَلَـٰلٍۢ وَسُعُرٍۢ ﴿47﴾

बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं

يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِى ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا۟ مَسَّ سَقَرَ ﴿48﴾

उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो

إِنَّا كُلَّ شَىْءٍ خَلَقْنَـٰهُ بِقَدَرٍۢ ﴿49﴾

बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है

وَمَآ أَمْرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٌۭ كَلَمْحٍۭ بِٱلْبَصَرِ ﴿50﴾

और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है

وَلَقَدْ أَهْلَكْنَآ أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍۢ ﴿51﴾

और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

وَكُلُّ شَىْءٍۢ فَعَلُوهُ فِى ٱلزُّبُرِ ﴿52﴾

और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है

وَكُلُّ صَغِيرٍۢ وَكَبِيرٍۢ مُّسْتَطَرٌ ﴿53﴾

(यानि) हर छोटा और बड़ा काम लिख दिया गया है

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍۢ وَنَهَرٍۢ ﴿54﴾

बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में

فِى مَقْعَدِ صِدْقٍ عِندَ مَلِيكٍۢ مُّقْتَدِرٍۭ ﴿55﴾

(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.3 / 29.5
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10 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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