क़ुरआन का रुकू 515 पढ़ें

रुकू 515 सूरह Al-Insan (आयत 23 से 31) से है। इसमें 9 आयतें हैं और यह जुज़ 29 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 515

9
आयतें
1
सूरह
29
जुज़
v.23 – v.31
आयतें

रुकू 515 में सूरह

الانسان · जुज़ 29
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سورة الانسان
जुज़ 29 86.3% (372/431)
हिज़्ब 58 73.8% (166/225)

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ تَنزِيلًۭا ﴿23﴾

(ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके नाज़िल किया

فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ ءَاثِمًا أَوْ كَفُورًۭا ﴿24﴾

तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तज़ार में सब्र किए रहो और उन लोगों में से गुनाहगार और नाशुक्रे की पैरवी न करना

وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةًۭ وَأَصِيلًۭا ﴿25﴾

सुबह शाम अपने परवरदिगार का नाम लेते रहो

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًۭا طَوِيلًا ﴿26﴾

और कुछ रात गए उसका सजदा करो और बड़ी रात तक उसकी तस्बीह करते रहो

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًۭا ثَقِيلًۭا ﴿27﴾

ये लोग यक़ीनन दुनिया को पसन्द करते हैं और बड़े भारी दिन को अपने पसे पुश्त छोड़ बैठे हैं

نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا ﴿28﴾

हमने उनको पैदा किया और उनके आज़ा को मज़बूत बनाया और अगर हम चाहें तो उनके बदले उन्हीं के जैसे लोग ले आएँ

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌۭ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًۭا ﴿29﴾

बेशक ये कुरान सरासर नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह ले

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًۭا ﴿30﴾

और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग कुछ भी चाह नहीं सकते बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार दाना है

يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا ﴿31﴾

जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.5 / 29.5
रोशनी 92%
12 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद