क़ुरआन का रुकू 545 पढ़ें

रुकू 545 सूरह Al-Asr (आयत 1 से 3) से है। इसमें 3 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 545

3
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.3
आयतें

रुकू 545 में सूरह

العصر · जुज़ 30
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पृष्ठ 601
रुकू 545
سورة العصر
जुज़ 30 89.4% (504/564)
हिज़्ब 60 79.2% (228/288)

وَٱلْعَصْرِ ﴿1﴾

नमाज़े अस्र की क़सम

إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَفِى خُسْرٍ ﴿2﴾

बेशक इन्सान घाटे में है

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ ﴿3﴾

मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 3 रबी अल-सानी
الأربعاء 3 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 4.5 / 29.5
रोशनी 21%
10 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है