रुकू 545 सूरह Al-Asr (आयत 1 से 3) से है। इसमें 3 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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وَٱلْعَصْرِ ﴿١﴾
नमाज़े अस्र की क़सम
إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَفِى خُسْرٍ ﴿٢﴾
बेशक इन्सान घाटे में है
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ ﴿٣﴾
मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे