मुसहफ़ का पृष्ठ 537 23 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 27, हिज़्ब 54 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 537 पढ़ें →
إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌۭ كَرِيمٌۭ ﴿٧٧﴾
कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है
فِى كِتَـٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ ﴿٧٨﴾
जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ ﴿٧٩﴾
इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٨٠﴾
सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है
أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ ﴿٨١﴾
तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ ﴿٨٢﴾
और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ ﴿٨٣﴾
तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍۢ تَنظُرُونَ ﴿٨٤﴾
और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ ﴿٨٥﴾
और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ ﴿٨٦﴾
तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो
تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿٨٧﴾
तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते
فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿٨٨﴾
पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है
فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ ﴿٨٩﴾
तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿٩٠﴾
और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है
فَسَلَـٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿٩١﴾
तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿٩٢﴾
और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है
فَنُزُلٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ ﴿٩٣﴾
तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ ﴿٩٤﴾
और जहन्नुम में दाखिल कर देना
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ ﴿٩٥﴾
बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ ﴿٩٦﴾
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ ﴿١﴾
जो जो चीज़ सारे आसमान व ज़मीन में है सब ख़ुदा की तसबीह करती है और वही ग़ालिब हिकमत वाला है
لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌ ﴿٢﴾
सारे आसमान व ज़मीन की बादशाही उसी की है वही जिलाता है वही मारता है और वही हर चीज़ पर कादिर है
هُوَ ٱلْأَوَّلُ وَٱلْـَٔاخِرُ وَٱلظَّـٰهِرُ وَٱلْبَاطِنُ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ ﴿٣﴾
वही सबसे पहले और सबसे आख़िर है और (अपनी क़ूवतों से) सब पर ज़ाहिर और (निगाहों से) पोशीदा है और वही सब चीज़ों को जानता