القلم · जुज़ 29
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का पृष्ठ 565 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 565 27 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 57 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 565 dans le Coran

27
आयतें
29
जुज़
57
हिज़्ब
1
सूरह

Sourate dans la page 565

जुज़ 29
पृष्ठ 565
سورة القلم
जुज़ 29 10.4% (45/431)
हिज़्ब 57 21.8% (45/206)

سَنَسِمُهُۥ عَلَى ٱلْخُرْطُومِ ﴿١٦﴾

हम अनक़रीब इसकी नाक पर दाग़ लगाएँगे

إِنَّا بَلَوْنَـٰهُمْ كَمَا بَلَوْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا۟ لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ ﴿١٧﴾

जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे

وَلَا يَسْتَثْنُونَ ﴿١٨﴾

और इन्शाअल्लाह न कहा

فَطَافَ عَلَيْهَا طَآئِفٌۭ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَآئِمُونَ ﴿١٩﴾

तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी

فَأَصْبَحَتْ كَٱلصَّرِيمِ ﴿٢٠﴾

तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात

فَتَنَادَوْا۟ مُصْبِحِينَ ﴿٢١﴾

फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचाने

أَنِ ٱغْدُوا۟ عَلَىٰ حَرْثِكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰرِمِينَ ﴿٢٢﴾

कि अगर तुमको फल तोड़ना है तो अपने बाग़ में सवेरे से चलो

فَٱنطَلَقُوا۟ وَهُمْ يَتَخَـٰفَتُونَ ﴿٢٣﴾

ग़रज़ वह लोग चले और आपस में चुपके चुपके कहते जाते थे

أَن لَّا يَدْخُلَنَّهَا ٱلْيَوْمَ عَلَيْكُم مِّسْكِينٌۭ ﴿٢٤﴾

कि आज यहाँ तुम्हारे पास कोई फ़क़ीर न आने पाए

وَغَدَوْا۟ عَلَىٰ حَرْدٍۢ قَـٰدِرِينَ ﴿٢٥﴾

तो वह लोग रोक थाम के एहतमाम के साथ फल तोड़ने की ठाने हुए सवेरे ही जा पहुँचे

فَلَمَّا رَأَوْهَا قَالُوٓا۟ إِنَّا لَضَآلُّونَ ﴿٢٦﴾

फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए

بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ ﴿٢٧﴾

(ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये है कि हम लोग बड़े बदनसीब हैं

قَالَ أَوْسَطُهُمْ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ لَوْلَا تُسَبِّحُونَ ﴿٢٨﴾

जो उनमें से मुनसिफ़ मिजाज़ था कहने लगा क्यों मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग (ख़ुदा की) तसबीह क्यों नहीं करते

قَالُوا۟ سُبْحَـٰنَ رَبِّنَآ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿٢٩﴾

वह बोले हमारा परवरदिगार पाक है बेशक हमीं ही कुसूरवार हैं

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَلَـٰوَمُونَ ﴿٣٠﴾

फिर लगे एक दूसरे के मुँह दर मुँह मलामत करने

قَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا طَـٰغِينَ ﴿٣١﴾

(आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे

عَسَىٰ رَبُّنَآ أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًۭا مِّنْهَآ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا رَٰغِبُونَ ﴿٣٢﴾

उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं

كَذَٰلِكَ ٱلْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا۟ يَعْلَمُونَ ﴿٣٣﴾

(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों

إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ ﴿٣٤﴾

बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे

أَفَنَجْعَلُ ٱلْمُسْلِمِينَ كَٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٣٥﴾

तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ﴿٣٦﴾

(हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो

أَمْ لَكُمْ كِتَـٰبٌۭ فِيهِ تَدْرُسُونَ ﴿٣٧﴾

या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ लेते हो

إِنَّ لَكُمْ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ ﴿٣٨﴾

कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी

أَمْ لَكُمْ أَيْمَـٰنٌ عَلَيْنَا بَـٰلِغَةٌ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۙ إِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُونَ ﴿٣٩﴾

या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा

سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ ﴿٤٠﴾

उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है

أَمْ لَهُمْ شُرَكَآءُ فَلْيَأْتُوا۟ بِشُرَكَآئِهِمْ إِن كَانُوا۟ صَـٰدِقِينَ ﴿٤١﴾

या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ

يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍۢ وَيُدْعَوْنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ ﴿٤٢﴾

जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं