المزمل · जुज़ 29
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क़ुरआन का पृष्ठ 575 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 575 18 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 58 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 575 dans le Coran

18
आयतें
29
जुज़
58
हिज़्ब
2
सूरह
जुज़ 29
पृष्ठ 575
سورة المزمل
जुज़ 29 58.7% (253/431)
हिज़्ब 58 20.9% (47/225)

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَىِ ٱلَّيْلِ وَنِصْفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٌۭ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلْقُرْءَانِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَءَاخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِى ٱلْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَءَاخَرُونَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍۢ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرًۭا وَأَعْظَمَ أَجْرًۭا ۚ وَٱسْتَغْفِرُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۢ ﴿٢٠﴾

(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार चाहता है कि तुम और तुम्हारे चन्द साथ के लोग (कभी) दो तिहाई रात के करीब और (कभी) आधी रात और (कभी) तिहाई रात (नमाज़ में) खड़े रहते हो और ख़ुदा ही रात और दिन का अच्छी तरह अन्दाज़ा कर सकता है उसे मालूम है कि तुम लोग उस पर पूरी तरह से हावी नहीं हो सकते तो उसने तुम पर मेहरबानी की तो जितना आसानी से हो सके उतना (नमाज़ में) क़ुरान पढ़ लिया करो और वह जानता है कि अनक़रीब तुममें से बाज़ बीमार हो जाएँगे और बाज़ ख़ुदा के फ़ज़ल की तलाश में रूए ज़मीन पर सफर एख्तेयार करेंगे और कुछ लोग ख़ुदा की राह में जेहाद करेंगे तो जितना तुम आसानी से हो सके पढ़ लिया करो और नमाज़ पाबन्दी से पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा को कर्ज़े हसना दो और जो नेक अमल अपने वास्ते (ख़ुदा के सामने) पेश करोगे उसको ख़ुदा के हाँ बेहतर और सिले में बुर्ज़ुग तर पाओगे और ख़ुदा से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ ﴿١﴾

ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो

قُمْ فَأَنذِرْ ﴿٢﴾

और लोगों को (अज़ाब से) डराओ

وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ ﴿٣﴾

और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ ﴿٤﴾

और अपने कपड़े पाक रखो

وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ ﴿٥﴾

और गन्दगी से अलग रहो

وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ ﴿٦﴾

और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो

وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ ﴿٧﴾

और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो

فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ ﴿٨﴾

फिर जब सूर फूँका जाएगा

فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍۢ يَوْمٌ عَسِيرٌ ﴿٩﴾

तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा

عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍۢ ﴿١٠﴾

आसान नहीं होगा

ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًۭا ﴿١١﴾

(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया

وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًۭا مَّمْدُودًۭا ﴿١٢﴾

और उसे बहुत सा माल दिया

وَبَنِينَ شُهُودًۭا ﴿١٣﴾

और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)

وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًۭا ﴿١٤﴾

और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी

ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ ﴿١٥﴾

फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ

كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًۭا ﴿١٦﴾

ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था

سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا ﴿١٧﴾

तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ