الانسان · जुज़ 29
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क़ुरआन का पृष्ठ 580 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 580 25 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 58 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 580 dans le Coran

25
आयतें
29
जुज़
58
हिज़्ब
2
सूरह
जुज़ 29
पृष्ठ 580
سورة الانسان
जुज़ 29 87.0% (375/431)
हिज़्ब 58 75.1% (169/225)

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًۭا طَوِيلًا ﴿٢٦﴾

और कुछ रात गए उसका सजदा करो और बड़ी रात तक उसकी तस्बीह करते रहो

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًۭا ثَقِيلًۭا ﴿٢٧﴾

ये लोग यक़ीनन दुनिया को पसन्द करते हैं और बड़े भारी दिन को अपने पसे पुश्त छोड़ बैठे हैं

نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا ﴿٢٨﴾

हमने उनको पैदा किया और उनके आज़ा को मज़बूत बनाया और अगर हम चाहें तो उनके बदले उन्हीं के जैसे लोग ले आएँ

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌۭ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًۭا ﴿٢٩﴾

बेशक ये कुरान सरासर नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह ले

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًۭا ﴿٣٠﴾

और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग कुछ भी चाह नहीं सकते बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार दाना है

يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا ﴿٣١﴾

जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا ﴿١﴾

हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं

فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًۭا ﴿٢﴾

फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं

وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا ﴿٣﴾

और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं

فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا ﴿٤﴾

फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं

فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا ﴿٥﴾

फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं

عُذْرًا أَوْ نُذْرًا ﴿٦﴾

ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿٧﴾

कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ ﴿٨﴾

फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ ﴿٩﴾

और जब आसमान फट जाएगा

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ ﴿١٠﴾

और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ ﴿١١﴾

और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे

لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ ﴿١٢﴾

(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है

لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ ﴿١٣﴾

फ़ैसले के दिन के लिए

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ﴿١٤﴾

और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٥﴾

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٦﴾

क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١٧﴾

फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे

كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿١٨﴾

हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٩﴾

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
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