रुकू 534 सूरह Al-Layl (आयत 1 से 21) से है। इसमें 21 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
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لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى ﴿١٥﴾
उसमें बस वही दाख़िल होगा जो बड़ा बदबख्त है
ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴿١٦﴾
जिसने झुठलाया और मुँह फेर लिया और जो बड़ा परहेज़गार है
وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى ﴿١٧﴾
वह उससे बचा लिया जाएगा
ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ ﴿١٨﴾
जो अपना माल (ख़ुदा की राह) में देता है ताकि पाक हो जाए
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍۢ تُجْزَىٰٓ ﴿١٩﴾
और लुत्फ ये है कि किसी का उस पर कोई एहसान नहीं जिसका उसे बदला दिया जाता है
إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ ﴿٢٠﴾
बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीशान परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए (देता है)
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ ﴿٢١﴾
और वह अनक़रीब भी ख़ुश हो जाएगा