الهمزة · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 546 पढ़ें

रुकू 546 सूरह Al-Humaza (आयत 1 से 9) से है। इसमें 9 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 546 dans le Coran

9
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.9
आयतें

Sourate dans le Ruku 546

पृष्ठ 601
रुकू 546
سورة العصر
जुज़ 30 89.9% (507/564)
हिज़्ब 60 80.2% (231/288)

وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ ﴿١﴾

हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है

ٱلَّذِى جَمَعَ مَالًۭا وَعَدَّدَهُۥ ﴿٢﴾

जो माल को जमा करता है और गिन गिन कर रखता है

يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُۥٓ أَخْلَدَهُۥ ﴿٣﴾

वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा

كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلْحُطَمَةِ ﴿٤﴾

हरगिज़ नहीं वह तो ज़रूर हुतमा में डाला जाएगा

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحُطَمَةُ ﴿٥﴾

और तुमको क्या मालूम हतमा क्या है

نَارُ ٱللَّهِ ٱلْمُوقَدَةُ ﴿٦﴾

वह ख़ुदा की भड़काई हुई आग है जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी

ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلْأَفْـِٔدَةِ ﴿٧﴾

ये लोग आग के लम्बे सुतूनो

إِنَّهَا عَلَيْهِم مُّؤْصَدَةٌۭ ﴿٨﴾

में डाल कर बन्द कर दिए

فِى عَمَدٍۢ مُّمَدَّدَةٍۭ ﴿٩﴾

जाएँगे

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