الفلق · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 555 पढ़ें

रुकू 555 सूरह Al-Falaq (आयत 1 से 5) से है। इसमें 5 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 555 dans le Coran

5
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.5
आयतें

Sourate dans le Ruku 555

पृष्ठ 604
रुकू 555
سورة الإخلاص
जुज़ 30 98.0% (553/564)
हिज़्ब 60 96.2% (277/288)

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾

हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣﴾

और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए

وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ﴿٤﴾

और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ﴿٥﴾

(जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं