المزمل · जुज़ 29
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सूरह Al-Muzzammil पढ़ें

सूरह Al-Muzzammil (المزمل) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 20 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

सूरह Al-Muzzammil अंकों में

कालानुक्रमिक अवतरण क्रम
अवतरण क्रमांक 3 / 114
(मक्की)
213
शब्द
-70.4% औसत से
914
अक्षर
-70.3% औसत से
2
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20
आयतें
-63.4% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति في سورة Al-Muzzammil

الله 7
رب 6

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर في سورة Al-Muzzammil

ل
103
#1
ا
75
#2
و
71
#3
ن
58
#4
م
52
#5
सूरह Al-Muzzammil पढ़ें
سورة المزمل
जुज़ 29 54.3% (234/431)
हिज़्ब 58 12.4% (28/225)

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُزَّمِّلُ ﴿١﴾

ऐ (मेरे) चादर लपेटे रसूल

قُمِ ٱلَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًۭا ﴿٢﴾

रात को (नमाज़ के वास्ते) खड़े रहो मगर (पूरी रात नहीं)

نِّصْفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا ﴿٣﴾

थोड़ी रात या आधी रात या इससे भी कुछ कम कर दो या उससे कुछ बढ़ा दो

أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ ٱلْقُرْءَانَ تَرْتِيلًا ﴿٤﴾

और क़ुरान को बाक़ायदा ठहर ठहर कर पढ़ा करो

إِنَّا سَنُلْقِى عَلَيْكَ قَوْلًۭا ثَقِيلًا ﴿٥﴾

हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना

إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيْلِ هِىَ أَشَدُّ وَطْـًۭٔا وَأَقْوَمُ قِيلًا ﴿٦﴾

ख़ूब (नफ्स का) पामाल करना और बहुत ठिकाने से ज़िक्र का वक्त है

إِنَّ لَكَ فِى ٱلنَّهَارِ سَبْحًۭا طَوِيلًۭا ﴿٧﴾

दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं

وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًۭا ﴿٨﴾

तो तुम अपने परवरदिगार के नाम का ज़िक्र करो और सबसे टूट कर उसी के हो रहो

رَّبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذْهُ وَكِيلًۭا ﴿٩﴾

(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ

وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهْجُرْهُمْ هَجْرًۭا جَمِيلًۭا ﴿١٠﴾

और जो कुछ लोग बका करते हैं उस पर सब्र करो और उनसे बा उनवाने शाएस्ता अलग थलग रहो

وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُو۟لِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا ﴿١١﴾

और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो

إِنَّ لَدَيْنَآ أَنكَالًۭا وَجَحِيمًۭا ﴿١٢﴾

बेशक हमारे पास बेड़ियाँ (भी) हैं और जलाने वाली आग (भी)

وَطَعَامًۭا ذَا غُصَّةٍۢ وَعَذَابًا أَلِيمًۭا ﴿١٣﴾

और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًۭا مَّهِيلًا ﴿١٤﴾

जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे

إِنَّآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْكُمْ رَسُولًۭا شَـٰهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًۭا ﴿١٥﴾

(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था

فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذْنَـٰهُ أَخْذًۭا وَبِيلًۭا ﴿١٦﴾

तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा

فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًۭا يَجْعَلُ ٱلْوِلْدَٰنَ شِيبًا ﴿١٧﴾

तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा

ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرٌۢ بِهِۦ ۚ كَانَ وَعْدُهُۥ مَفْعُولًا ﴿١٨﴾

जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌۭ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا ﴿١٩﴾

बेशक ये नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह एख्तेयार करे

सूरह Al-Muzzammil पढ़ें
سورة المزمل
जुज़ 29 58.7% (253/431)
हिज़्ब 58 20.9% (47/225)

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَىِ ٱلَّيْلِ وَنِصْفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٌۭ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلْقُرْءَانِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَءَاخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِى ٱلْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَءَاخَرُونَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍۢ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرًۭا وَأَعْظَمَ أَجْرًۭا ۚ وَٱسْتَغْفِرُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۢ ﴿٢٠﴾

(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार चाहता है कि तुम और तुम्हारे चन्द साथ के लोग (कभी) दो तिहाई रात के करीब और (कभी) आधी रात और (कभी) तिहाई रात (नमाज़ में) खड़े रहते हो और ख़ुदा ही रात और दिन का अच्छी तरह अन्दाज़ा कर सकता है उसे मालूम है कि तुम लोग उस पर पूरी तरह से हावी नहीं हो सकते तो उसने तुम पर मेहरबानी की तो जितना आसानी से हो सके उतना (नमाज़ में) क़ुरान पढ़ लिया करो और वह जानता है कि अनक़रीब तुममें से बाज़ बीमार हो जाएँगे और बाज़ ख़ुदा के फ़ज़ल की तलाश में रूए ज़मीन पर सफर एख्तेयार करेंगे और कुछ लोग ख़ुदा की राह में जेहाद करेंगे तो जितना तुम आसानी से हो सके पढ़ लिया करो और नमाज़ पाबन्दी से पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा को कर्ज़े हसना दो और जो नेक अमल अपने वास्ते (ख़ुदा के सामने) पेश करोगे उसको ख़ुदा के हाँ बेहतर और सिले में बुर्ज़ुग तर पाओगे और ख़ुदा से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है