क़ुरआन का पृष्ठ 578 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 578 26 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 58 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 578

26
आयतें
29
जुज़
58
हिज़्ब
2
सूरह
القيامة · जुज़ 29
नेविगेशन
बुकमार्क
ऑडियो
हिफ़्ज़
प्रदर्शन
जुज़ 29
◄ पृष्ठ 578 ►
سورة القيامة
जुज़ 29 76.3% (329/431)
हिज़्ब 58 54.7% (123/225)

كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ ﴿20﴾

मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो

وَتَذَرُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ ﴿21﴾

और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاضِرَةٌ ﴿22﴾

उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे

إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌۭ ﴿23﴾

(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे

وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۭ بَاسِرَةٌۭ ﴿24﴾

और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे

تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌۭ ﴿25﴾

समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी

كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ ﴿26﴾

सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी

وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍۢ ﴿27﴾

और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है

وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلْفِرَاقُ ﴿28﴾

और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है

وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ ﴿29﴾

और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمَسَاقُ ﴿30﴾

उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ ﴿31﴾

तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी

وَلَـٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴿32﴾

मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा

ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ ﴿33﴾

अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला

أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ ﴿34﴾

अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है

ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰٓ ﴿35﴾

तुझ पर फिर तुफ़ है

أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ﴿36﴾

क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा

أَلَمْ يَكُ نُطْفَةًۭ مِّن مَّنِىٍّۢ يُمْنَىٰ ﴿37﴾

क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है

ثُمَّ كَانَ عَلَقَةًۭ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴿38﴾

फिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया

فَجَعَلَ مِنْهُ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ ﴿39﴾

फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत

أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَـٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحْـِۧىَ ٱلْمَوْتَىٰ ﴿40﴾

क्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे

هَلْ أَتَىٰ عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ حِينٌۭ مِّنَ ٱلدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْـًۭٔا مَّذْكُورًا ﴿1﴾

बेशक इन्सान पर एक ऐसा वक्त अा चुका है कि वह कोई चीज़ क़ाबिले ज़िक्र न था

إِنَّا خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍۢ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَـٰهُ سَمِيعًۢا بَصِيرًا ﴿2﴾

हमने इन्सान को मख़लूत नुत्फे से पैदा किया कि उसे आज़माये तो हमने उसे सुनता देखता बनाया

إِنَّا هَدَيْنَـٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًۭا وَإِمَّا كَفُورًا ﴿3﴾

और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा

إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ سَلَـٰسِلَا۟ وَأَغْلَـٰلًۭا وَسَعِيرًا ﴿4﴾

हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍۢ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا ﴿5﴾

बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 18.5 / 29.5
रोशनी 85%
11 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद