क़ुरआन का रुकू 391 पढ़ें

रुकू 391 सूरह Sad (आयत 1 से 14) से है। इसमें 14 आयतें हैं और यह जुज़ 23 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 391

14
आयतें
1
सूरह
23
जुज़
v.1 – v.14
आयतें

रुकू 391 में सूरह

ص · जुज़ 23
पृष्ठ 453
रुकू 391
سورة ص
जुज़ 23 66.7% (238/357)
हिज़्ब 46 24.2% (38/157)

صٓ ۚ وَٱلْقُرْءَانِ ذِى ٱلذِّكْرِ ﴿١﴾

सआद नसीहत करने वाले कुरान की क़सम (तुम बरहक़ नबी हो)

بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى عِزَّةٍۢ وَشِقَاقٍۢ ﴿٢﴾

मगर ये कुफ्फ़ार (ख्वाहमख्वाह) तकब्बुर और अदावत में (पड़े अंधे हो रहें हैं)

كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍۢ فَنَادَوا۟ وَّلَاتَ حِينَ مَنَاصٍۢ ﴿٣﴾

हमने उन से पहले कितने गिरोह हलाक कर डाले तो (अज़ाब के वक्त) ये लोग चीख़ उठे मगर छुटकारे का वक्त ही न रहा था

وَعَجِبُوٓا۟ أَن جَآءَهُم مُّنذِرٌۭ مِّنْهُمْ ۖ وَقَالَ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا سَـٰحِرٌۭ كَذَّابٌ ﴿٤﴾

और उन लोगों ने इस बात से ताज्जुब किया कि उन्हीं में का (अज़ाबे खुदा से) एक डरानेवाला (पैग़म्बर) उनके पास आया और काफिर लोग कहने लगे कि ये तो बड़ा (खिलाड़ी) जादूगर और पक्का झूठा है

أَجَعَلَ ٱلْـَٔالِهَةَ إِلَـٰهًۭا وَٰحِدًا ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌ عُجَابٌۭ ﴿٥﴾

भला (देखो तो) उसने तमाम माबूदों को (मटियामेट करके बस) एक ही माबूद क़ायम रखा ये तो यक़ीनी बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है

وَٱنطَلَقَ ٱلْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ ٱمْشُوا۟ وَٱصْبِرُوا۟ عَلَىٰٓ ءَالِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌۭ يُرَادُ ﴿٦﴾

और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है

مَا سَمِعْنَا بِهَـٰذَا فِى ٱلْمِلَّةِ ٱلْـَٔاخِرَةِ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا ٱخْتِلَـٰقٌ ﴿٧﴾

हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है

أَءُنزِلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ مِنۢ بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِى شَكٍّۢ مِّن ذِكْرِى ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا۟ عَذَابِ ﴿٨﴾

क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे

أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ ٱلْعَزِيزِ ٱلْوَهَّابِ ﴿٩﴾

(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं

أَمْ لَهُم مُّلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا۟ فِى ٱلْأَسْبَـٰبِ ﴿١٠﴾

या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान की सलतनत इन्हीं की ख़ास है तब इनको चाहिए कि रास्ते या सीढियाँ लगाकर (आसमान पर) चढ़ जाएँ और इन्तेज़ाम करें

جُندٌۭ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌۭ مِّنَ ٱلْأَحْزَابِ ﴿١١﴾

(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा

كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍۢ وَعَادٌۭ وَفِرْعَوْنُ ذُو ٱلْأَوْتَادِ ﴿١٢﴾

उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला

وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍۢ وَأَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَحْزَابُ ﴿١٣﴾

और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है

إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ ٱلرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ ﴿١٤﴾

(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.1 / 29.5
रोशनी 80%
10 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है