क़ुरआन का रुकू 549 पढ़ें

रुकू 549 सूरह Al-Maun (आयत 1 से 7) से है। इसमें 7 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 549

7
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.7
आयतें

रुकू 549 में सूरह

الماعون · जुज़ 30
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سورة الماعون
जुज़ 30 93.1% (525/564)
हिज़्ब 60 86.5% (249/288)

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿1﴾

क्या तुमने उस शख़्श को भी देखा है जो रोज़ जज़ा को झुठलाता है

فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ ﴿2﴾

ये तो वही (कम्बख्त) है जो यतीम को धक्के देता है

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿3﴾

और मोहताजों को खिलाने के लिए (लोगों को) आमादा नहीं करता

فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿4﴾

तो उन नमाज़ियों की तबाही है

ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿5﴾

जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल रहते हैं

ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ ﴿6﴾

जो दिखाने के वास्ते करते हैं

وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ ﴿7﴾

और रोज़मर्रा की मालूली चीज़ें भी आरियत नहीं देते

بسم الله الرحمن الرحيم सोम 7 जुमादा अल-अव्वल
الاثنين 7 جمادى الأولى
التربيع الأول पहली तिमाही दिन 8.2 / 29.5
रोशनी 58%
7 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद