सूरह Ad-Duha (الضحى) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 11 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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وَٱلضُّحَىٰ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿٢﴾
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿٣﴾
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿٤﴾
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿٥﴾
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿٦﴾
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿٧﴾
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿٨﴾
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿٩﴾
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿١٠﴾
माँगने वाले को झिड़की न देना
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿١١﴾
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना