अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है…

इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है…

हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

📖 1 मिनट पढ़ने का समय

हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "म…

عن سهل بن سعد رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «بُعِثْتُ أنا والساعةَ هكذا»، ويُشير بإصبعيه فيَمُدُّ بهما.

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "म…

यहाँ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने क़यामत के निकट होने की बात कही है। क्योंकि आपका नबी बनकर आना तथा क़यामत का दिन, दोनों एक-दूसरे से निकट हैं, बिल्कुल उसी तरह, जिस तरह आपकी दोनों उँगलियाँ एक-दूसरे से निकट हैं। ऐसा बताते समय आपने अपनी दोनों उँगलियों को फैलाकर दिखाया है, ताकि उन्हें अन्य उँगलियों से अलग दिखाया जा सके।

कुछ अन्य हदीसों में आया है कि यह दोनों उँगलियाँ तर्जनी एवं मध्यमा थीं। हदीस में तर्जनी के लिए "अल-सब्बाबा" का शब्द आया है, जिससे मुराद अंगूठा एवं मध्यमा के बीच की उँगली है। अगर आप तर्जनी एवं मध्यमा को मिलाकर देखें, तो पाएँगे कि दोनों एक-दूसरे से निकट हैं और उनके बीच दूरी बहुत ही कम है। उनके बीच दूरी केवल नाखून के बराबर या आधे नाखून के बराबर है। याद रहे कि अरबी में तर्जनी को "अल-सब्बाबा" इसलिए कहा जाता है कि इन्सान किसी को गाली देते समय उसी से इशारा करता है। वैसे, उसे "अस-सब्बाहा" भी कहा जाता है। क्योंकि इन्सान अल्लाह की महानता बयान करते समय भी उसी को उठाकर आकाश की ओर इशारा करता है। इस हदीस का मतलब यह है कि दुनिया का अंत निकट है, कुछ दूर नहीं।

श्रेणियाँ : अक़ीदा · अंतिम दिवस पर ईमान · क़यामत की निशानयाँ

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद