क़यामत की निशानयाँ पर हदीसें

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«क़यामत की निशानयाँ» पर 27 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

क़यामत की निशानयाँ पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल सह़ीह़ क़यामत से पहले छह निशानियाँ सामने आएँगी, उन्हें गिन लो। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है।" यह कहते समय आपने अपनी दोनों उँगलियों को फैलाकर उनसे इशारा सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक हिजाज़ की भूमि से ऐसी आग न निकले, जिससे बुसरा में मौजूद ऊँटों की गरदनें चमक उठें। सह़ीह़ मेरी उम्मत के अंतिम ज़माने में एक ख़लीफ़ा होगा, जो गिने बिना लप भर-भरकर लोगों को माल देगा। सह़ीह़ तुम अरब उपमहाद्वीप के काफ़िरों से युद्ध करोगे और अल्लाह इस क्षेत्र में तुम्हें विजय प्रदान करेगा, फिर फ़ारस क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षे स़ह़ीह़ यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस धर्म को दा सह़ीह़ मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अ सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आ सकती, जब तक तुम तुर्कों से युद्ध न कर लो, जिनकी आँखें छोटी-छोटी, चेहरे लाल और नाक छोटी तथा चिपटी होगी, तथा उनके चेहरे ऐसे मालू सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम ख़ूज़ और किरमान के ग़ैरअरब लोगों से युद्ध न कर लो, जिनके चेहरे लाल, नाक चिपटी और आँखें छोटी-छोटी होंगी। उनके चेह सह़ीह़ \उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को सह़ीह़ आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती सह़ीह़ उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उसपर लोटने सह़ीह़ क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे। सह़ीह़ लोग मदीना को, उस के बेहतर अवस्था में होने के बावजूद, छोड़ जाएँगे। उस समय उसका रुख वहशी दरिंदों और परिंदों के सिवा कोई नहीं करेगा। सह़ीह़ अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा। सह़ीह़ लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर् सह़ीह़ सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह की यहाँ कोई हैसियत न होगी। स़ह़ीह़ अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, अरबों का विनाश उस बुराई से होना है, जो निकट आ गई है। आज याजूज और माजूज की दीवार में इतना छेद हो गया है। ह़सन वह लोग सबसे बुरे लोगों में से हैं, जो क़यामत आते समय जीवित रहेंगे तथा जो क़ब्रों को मस्जिद बना लेंगे। सह़ीह़ एक सैन्यदल काबे पर आक्रमण करने के इरादे से निकलेगा। जब वह एक चटियल मैदान में पहुँचेगा, तो उसके शुरू से आख़िर तक के सब लोग धरती में धँसा दिए जाएँगे। सह़ीह़ ऐ ख़ालिद, मेरे बाद बहुत-सी घटनाएँ, फ़ितने और मतभेद उत्पन्न होंगे। अतः, यदि तुमसे हो सके कि तुम अल्लाह के मारने वाले बंदे की बजाय मरने वाले बंदे बनो, त सह़ीह़ हम लोग हज्जतुल वदा के बारे में बात कर रहे थे और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे बीच मौजूद थे, लेकिन हमें पता नहीं था कि हज्जतुल वदा क्या है। सह़ीह़ प्रत्येक नबी ने अपनी क़ौम को झूठे काना से डराया है स़ह़ीह़ जिसने सूरा कह्फ़ के आरंभ की दस आयतें कंठस्थ कर लीं, वह दज्जाल से सुरक्षित रहेगा।" एक रिवायत में है : "सूरा कह्फ़ के अंत की। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक दिन सुबह को दज्जाल का ज़िक्र किया। आपने उसे इतना तुच्छ बताया और उसके फ़ितने को इतना भयानक दिखाया कि हम
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أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद