इस्लाम > Hi > हदीस > आहवन एव भलई क आदश दन तथ बरई स रकन क परबध करन > एक मुस्लिम व्यक्ति पर ज़रूरी है कि वह सुने और आज्ञा का पानल करे। चाहे उसे पसंद हो या नापसं…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن ابن عمر رضي الله عنهما مرفوعاً: «على المرء المسلم السمع والطاعة فيما أحب وكَرِهَ، إلا أن يُؤمر بمعصية، فإذا أُمِرَ بمعصية فلا سمع ولا طاعة».
इस हदीस में बताया गया है कि शासक के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है, चाहे उसका आदेश हमें पसंद हो या नापसंद। हाँ, यदि किसी गुनाह का आदेश दिया जाए, तो बात अलग है। क्योंकि गुनाह के काम में उसके आदेश का अनुपालन नहीं किया जाएगा।
श्रेणियाँ : शरई राजनीति · जनता पर इमाम (शासनाध्यक्ष) का अधिकार · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना