आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना पर हदीसें

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«आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना» पर 100 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। फिर उसने अपना मोज़ा सह़ीह़ उतने ही कार्य किया करो, जिस (को जारी रखने) की तुम शक्ति रखते हो, अल्लाह की क़सम, अल्लाह (प्रतिफल देने से) नहीं उकताएगा, यहाँ तक कि तुम ख़ुद (उसे जारी सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने महल्लों में मस्जिदें बनाने तथा उन्हें पवित्र एवं स्वच्छ और सुगंधित रखने का आदेश दिया है। सह़ीह़ मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल् ह़सन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ख़ालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु अन्हु को यमन की ओर भेजा कि यमन वालों को इसलाम का निमंत्रण दें। लेकिन यमन वालों ने उनकी ब सह़ीह़ अव्वाबीन (नेक लोगों) की नमाज़ उस समय होती है जब ऊँट के बच्चों के पाँव जलने लगें। सह़ीह़ ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे सह़ीह़ जब अल्लाह तआला, शासक या अधिकारी के साथ भलाई का इरादा करता है, तो उसे सच्चा सहायक प्रदान करता है, जो भूलने पर याद दिलाता है और याद रहने पर सहायता करता सह़ीह़ अल्लाह ने जितने भी नबी भेजे और जितने भी शासक बनाए, सबके दो प्रकार के सलाहकार होते हैं; एक वह सलाहकार जो भलाई का आदेश देता है और उसकी प्रेरणा देता है। ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन) जिहाद का एक बहुत बड़ा रूप किसी अत्याचारी शासक के सामने न्याय की बात करना है। स़ह़ीह़ हमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कठिनाई और आसानी में, चुस्ती और सुस्ती में और हमारे ऊपर तरजीह दिए जाने की अवस्था में भी सुनेंगे और अनुस सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़िल्लाह अन्हु- प्रत्येक गुरूवार को हमें उपदेश दिया करते थे। सह़ीह़ अगर बहरैन का धन आया, तो मैं तुम्हें इस तरह, इस तरह और इस तरह दूँगा। सह़ीह़ एक अल्लाह की इबादत करो, किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा उन बातों को छोड़ दो जो तुम्हारे बाप-दादा कहते हैं। तथा हमें नमाज़ एवं सत्य का आदेश देते हैं। सह़ीह़ ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भल स़ह़ीह़ आने वाले समय में वरीयता दिए जाने के मामले और ऐसी बातें सामने आएँगी, जो तुम्हें बुरी लगेंगी।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! तो आप हमें क्या आदेश देत सह़ीह़ लोगों को आदेश दिया गया है कि उनका अंतिम कार्य काबा का तवाफ़ हो। हाँ, मगर माहवारी के दिनों वाली स्त्री के लिए आसानी रखी गई है। सह़ीह़ राजा, जादूगर तथा राहिब के साथ लड़के की कहानी सह़ीह़ ऐ अबूज़र, में तुमको कमज़ोर समझता हूँ, तथा तुम्हारे लिए भी वही बात पसंद करता हूँ, जो मैं अपने लिए पसंद करता हूँ; दो व्यक्तियों का भी अमीर न बनना और न क स़ह़ीह़ अल्लाह की सीमाओं पर रुकने वाले तथा उनका उल्लंघन करने वाले का उदाहरण ऐसा है, जैसे कुछ लोगों ने एक कश्ती में बैठने के लिए कु़रआ निकाला और कुछ लोग ऊपरी म सह़ीह़ लोगों से वही बात करो, जो वे समझ सकते हैं। क्या तुम चाहते हो कि अल्लाह तथा उसके रसूल को झुठलाया जाए? स़ह़ीह़ ऐ चचा जान, आप 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कह दें, मैं इस कलिमा को अल्लाह के पास प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत करूँगा। सह़ीह़ ऐ अबूज़र, तुम एक दुर्बल व्यक्ति हो और यह पद एक अमानत है और यह क़यामत के दिन अपमान तथा शर्मिंदगी का सामान भी है। यह और बात है कि कोई उसे उसके हक़ के सा स़ह़ीह़ जब लोग किसी को अत्याचार करते हुए देखें और उसका हाथ न पकड़ें, तो संभव है कि अल्लाह उन तमाम लोगों पर अपना अज़ाब उतार दे। स़ह़ीह़ तुमपर ऐसे शासक नियुक्त हो जाएँगे, जिनके कुछ काम तुम्हें अच्छे लगेंगे और कुछ बुरे। ऐसे में जो (उनके बुरे कामों को) बुरा जानेंगे, वह बरी हो जाएँगे और जो सह़ीह़ मुझे याद आया कि हमारे पास सोने का एक टुकड़ा रखा हुआ है। अतः, मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि मेरा ध्यान उसी में अटका रहे। सो, मैंने उसे बाँटने का आदेश दे दि सह़ीह़ अल्लाह की क़सम! हम यह कार्य किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपते, जो माँगकर लेना चाहे अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपते, जो उसकी लालसा रखे। ह़सन उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, तुम अवश्य ही भलाई का आदेश देते रहोगे तथा बुराई से रोकते रहोगे, वरना अल्लाह अपनी ओर से तुमपर कोई सज़ा भेज देगा सह़ीह़ ऐ बेटे! मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना हैः सबसे बुरे शासक, जनसाधारण पर अत्याचार करने वाले हैं। अतः, तुम ऐसे लोगों मे स़ह़ीह़ जब बंदा बीमार होता है या यात्रा में निकलता है, तो उसके लिए उसी तरह की इबादतों का सवाब लिखा जाता है, जो वह घर में रहते तथा स्वस्थ रहते समय किया करता था सह़ीह़ निश्चय ही तूने जिस प्रतिफल की आशा रखी है, वह तुझे मिलेगा। सह़ीह़ कोई वस्तु माँगने में हद से ज्यादा आग्रह मत करो। क्योंकि तुममें से कोई व्यक्ति जब मुझसे कोई चीज़ माँगता है और मुझे पसंद न होेने के बावजूद उसका सवाल मुझ स़ह़ीह़ मेरी ओर से मिली वाणी दूसरों तक पहुँचा दो, चाहे एक आयत ही हो, तथा इसराईली वंश के लोगों की घटनाओं का वर्णन करो, इसमें कोई हर्ज नहीं है, तथा जिसने मुझपर सह़ीह़ जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़ने के लिए उठे और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए सह़ीह़ जो मुसलमान कोई पेड़ लगाता है तो उससे जो कुछ खाया जाएगा वह उसके लिए सदक़ा होगा, जो कुछ चुराया जाएगा वह उसके लिए सदक़ा होगा और जो कुछ किसी के द्वारा लिय सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में कुछ लोगों की पकड़ वह्य (प्रकाशना) द्वारा हो जाती थी। परन्तु, अब वह्य का सिलसिला बंद हो चुका है स़ह़ीह़ धर्म, शुभचिंतन का नाम है सह़ीह़ अल्लाह ने अपने रसूल को अनुमति दी थी, तुम्हें अनुमति नहीं दी है। वैसे भी, मुझे केवल दिन की एक घड़ी के लिए अनुमति दी थी। आज वह उसी तरह हराम है, जैसे कल स़ह़ीह़ आदमी के हर एक जोड़ पर, हर रोज़ जिसमें सूरज निकलता है, सदक़ा है। सह़ीह़ वे तुम्हें नमाज़ पढ़ाएँगे; अब यदि सही-सही पढ़ाएँगे तो तुम्हारे लिए होगी और यदि ग़लती करेंगे तो तुम्हारे लिए सही और उनके विरुद्ध होगी। सह़ीह़ ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी मामले का ज़िम्मवार बने और उन्हें कठिनाई में डाले, तू भी उसे कठिनाई में डाल तथा जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी म सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जा रहा था और आपके शरीर पर एक मोटे किनारे वाली नजरानी चादर थी। इसी बीच, आपको एक देहाती मिला और बड़ सह़ीह़ सब्र से काम लो। क्योंकि हर बाद में आने वाला समय पहले वाले के मुक़ाबले में बुरा होगा, यहाँ तक कि तुम अपने रब से जा मिलो। स़ह़ीह़ सुनो और अनुसरण करो। उनपर उस बात की ज़िम्मेवारी है, जो उनके ऊपर डाली गई है और तुमपर उस बात की ज़िम्मेवारी है, जो तुमपर डाली गई है। सह़ीह़ कूफ़ा वालों ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के यहाँ साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शिकायत की, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनको हटाकर अम्मार स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर वह उन्हें कठिनाई में डाले, तो तू उसे कठिनाई में डाल। और जो मेरी उम्मत की कोई ज़िम्म स़ह़ीह़ जिस बंदे को अल्लाह जनता की रखवाली का काम सोंपे और वह जिस दिन मरे तो उन्हें धोखा देते हुए मर जाए, तो उसपर अल्लाह जन्नत हराम कर देता है। सह़ीह़ तथा जो किसी इमाम की बैअत करे और उसे अपना हाथ तथा अपने दिल का फल दे दे, उसे चाहिए कि जहाँ तक हो सके, उसका अनुसरण करे। फिर अगर कोई दूसरा उसे अपने मातहत सह़ीह़ तुममें से जिसे मैं किसी प्रशासनिक काम की ज़िम्मेवारी दूँ, फिर उसने हमसे एक सूई या उससे भी छोटी चीज़ छिपाई, तो वह ख़यानत में शुमार होगा, जिसे लेकर वह क सह़ीह़ उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने पहले हिजरत करने वाले मुहाजिरों के लिए पेंशन की राशि निर्धारित की। सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचा, तो उस समय आप ख़ुतबा दे रहे थे। सह़ीह़ जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, स़ह़ीह़ धर्म आसान एवं सरल है और धर्म के मामले में जो भी उग्रता दिखाएगा, वह परास्त होगा। अतः, बीच का रास्ता अपनाओ, अच्छा करने की चेष्टा करो, सह़ीह़ निश्चय ही तुमपर तुम्हारे रब का अधिकार है। निश्चय ही तुमपर स्वंय तुम्हारे शरीर तथा तुम्हारी पत्नी का अधिकार है। अतः प्रत्येक अधिकार वाले को उसका अधिकार स़ह़ीह़ तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा। स़ह़ीह़ “जो मुसलिम शासक के आज्ञापालन से इनकार करे और (मुसलमानों की) जमात से निकल जाए, फिर उसकी मृत्यु हो जाए तो ऐसी मृत्यु जाहिलियत वाली मृत्यु है स़ह़ीह़ “जो तुम्हारे पास इस हाल में आए कि तुम लोग किसी को ख़लीफ़ा मानकर उसका अनुसरण कर रहे हो तथा वह तुम्हारी एकता को भंग करना चाहे या तुम्हारी जमात में बिखरा सह़ीह़ जो स्वयं किसी कार्य को करने के लिए लालायित हो हम उसको अपने किसी कार्य के लिए उपयोग नहीं करते। परन्तु ऐ अबू मूसा, अथवा ऐ अब्दुल्लाह बिन क़ैस (यह अबू मू सह़ीह़ निःसंदेह अल्लाह ने मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सत्य के साथ भेजा है और आपके ऊपर (कुरआन नामक) किताब उतारी है। आपपर जो आयतें उतारी गईं हैं, उनम
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद